CITY Star : बच्चों का भविष्य संवार रही गाजियाबाद की प्रगति रॉय

संक्षेप:

  • प्रगति रॉय एनजीओ में बच्चों को कर रही शिक्षित
  • टीचर होने के साथ-साथ पढ़ाई भी कर रही प्रगति रॉय
  • पढ़ने और पढ़ाने का बचपन से शौक – प्रगति रॉय

गाजियाबाद : गाजियाबाद के राधे श्याम पार्क में रहने वाली प्रगति रॉय जो शिक्षिका के रूप में एनजीओ में बच्चों को शिक्षित कर रही है और साथ ही अपनी पढ़ाई को भी तव्वजो दे रही है। प्रगति का मानना है कि आज के दौर में इंग्लिश एक ऐसी भाषा बनती जा रही है जिसके बिना आज के बच्चे और युवा अधूरे है। हर क्षेत्र में आज इंग्लिश इतनी परिचलित हो चुकी है कि जिसे ये भाषा नहीं आती उसे लोग अलग नज़रिए से देखने लगते और जब कही नौकरी के लिए भी जाते है तो ज़्यादा तर इंटरव्यू इंग्लिश में ही होते है।

जिसके चलते प्रगति ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी को उठाना ज़रूरी समझा। प्रगति ने मानना है कि एनजीओ में ज़्यादातर वहीं आते है जिनके मां-बाप प्राइवेट स्कूलों की फीस भरने में असर्मथ होते है, लेकिन अपने बच्चों को बुलंदियों तक देखना चाहते है। ऐसे बच्चों को सिखाने के लिए वह हमेशा तत्पर है। प्रगति के साथ बातचीत के कुछ अंश..  

सवाल - अपने बारे में बताईये ?

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जवाब - मेरा नाम प्रगति रॉय है, में दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए कर रही हूं, और मुझे बच्चों को पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। मुझे शुरू से ही पढ़ने और पढ़ाने का शौक रहा है। इस वक्त मैं एक एनजीओ में बच्चों को पढ़ाती हूं और ये कोशिश करती हूं कि वे अपना जिंदगी में बेहतर करके दिखायें।

सवाल- आपने टीचर की लाइन ही क्यों चुनी ?

जवाब- मुझे शुरू से ही बच्चों को पढ़ाने का शौक था और मैं शुरू से ही एक टीचर बनना चाहती थी। जब भी मैं उन बच्चों को देखती थी जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे और ठीक से इंग्लिश में अपना नाम तक नहीं लिख पाते थे तो मुझे बड़ा अजीब लगता था। इसलिए मैंने अभी से एनजीओ के बच्चों को पढ़ना शुरू कर दिया। जिससे बच्चों को शिक्षित करने की ओर छोटा ही सही लेकिन सही कदम उठाया है। जिससे मुझे इनर सैटिस्फैक्शन मिलता है।

सवाल - जैसे कि आपने बताया आप खुद भी एक स्टूडेंट है और दूसरी ओर एक टीचर, ये सब आप मैनेज कैसे करती है?

जवाब - अगर सही टाइम मैनेजमेंट हो तो मैनेज करना इतना भी मुश्किल भी नहीं होता और जब आप दिल से कोई काम करते है तो उसके लिए हम खुद टाइम निकाल लेते है। इसलिए मुझे इतनी मुश्किल नहीं होती। मैं रात में खुद पढ़ती हूं और दिन में बच्चों को पढ़ाती हूं। यह अब मैं सिर्फ एक जॉब समझ कर नहीं करती बल्कि यह एक जिम्मेदारी है जिसे मुझे निभाना अच्छा लगता है।

सवाल - NYOOOZ के माध्यम से आप कहना चाहेगी?

जवाब - आपके चैनल के माध्यम से मैं यह कहना चाहूंगी कि हम से जैसे भी और जितनी भी हो सके उन बच्चों की सहायता करनी चाहिए। जो आगे बढ़ना चाहते हो और फाइनेंसियल प्रॉब्लम की विजय से पीछे रह रहे हो और अगर हमारे बस में हो तो ऐसे बच्चों की मदद ज़रूर करनी चाहिए। क्योंकि शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है। जिससे हर जंग को जीता जा सकता है।

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