आईआईटी रुड़की व एचबीटीआई के छात्रों का कमाल, कूड़े से पैदा होगी बिजली, खत्म होगी जहरीली मीथेन गैस

संक्षेप:

  • गाजियाबाद की कूड़े की समस्या के स्थायी समाधान।
  • तीन माह में बनाया प्लांट।
  • गांव में पंचायत स्तर और सोसायटियों में प्लांट लगाने की योजना।

गाजियाबाद- गाजियाबाद की कूड़े की समस्या के स्थायी समाधान के साथ जहरीली मीथेन गैस को खत्म करने की दिशा में आईआईटी रुड़की और हरकोर्ट बटलय टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (एचबीटीआई) से पासआउट उद्यमियों ने बड़ी पहल की है।

साउथ साइड औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों की कंपनी एनएस एनर्जी ग्रुप ने चार माह में कूड़े से बिजली बनाने का गैस आधारित पावर प्लांट तैयार किया है। 100 किलोवाट की उच्च क्षमता के प्लांट का बृहस्पतिवार को सफल ट्रायल रन किया गया। प्लांट की मदद से शहर के गीले और सूखे कूड़े को ठिकाने लगाने के साथ पैदा होने वाली बिजली से दोहरा लाभ होगा।

बनेंगे 10 व 30 केवीए के छोटे प्लांट, प्रति किलोवाट एक लाख लागत
कंपनी के समूह निदेशक नीरज गुप्ता का कहना है कि शहरी कचरे के वैज्ञानिक पद्धति से समाधान और बिजली बनाने का यह पहला आधुनिक व किफायती संयंत्र है। प्लांट पर्यावरण को बगैर नुकसान पहुंचाए कचरा प्रबंधन करेगा। प्रति किलोवाट प्लांट की लागत एक लाख रुपये है। ऐसे में बड़े के साथ 10 और 30 केवीए के छोटे प्लांट बनाकर स्थापित किए जाएंगे। इससे शहर और गांव दोनों जगह के गीले और सूखे कूड़े का निदान हो सकेगा।

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गांव में पंचायत स्तर और सोसायटियों में प्लांट लगाने की योजना

कंपनी की योजना सरकार की मदद से हर ग्राम पंचायत स्तर पर ऐसे प्लांट स्थापित करने की है। इससे शहर के साथ हर गांव कूड़ा मुक्त बनाने में मदद मिलेगी। गांव के घरों और कृषि आधारित कूड़े से प्लांट के जरिये पैदा होने वाली बिजली सड़कों और पंचायत भवन और सार्वजनिक स्थानों को रोशन किया जा सकेगा। वहीं सोसायटियों में क्षमता अनुसार प्लांट की मदद से कूड़े का अंदर ही समाधान और सार्वजनिक प्रयोग में होने वाली बिजली के बिल को कम किया जा सकेगा।

प्लांट से पैदा होगी हाइड्रोजन गैस
कंपनी के निदेशक प्रोजेक्ट रामेश्वर दयाल गुप्ता का कहना है कि कंपनी का प्लांट सभी मानकों पर खरा उतरा है। वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड जितनी जिम्मेदार है मीथेन गैस उससे 73 फीसदी ज्यादा खतरनाक है। इस संयंत्र में मीथेन गैस को पूरी तरह से खत्म करने के साथ हाइड्रोजन ग्रे गैस पैदा करने की भी क्षमता है। कंपनी को संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक योजना के तहत खाड़ी देश यमन में 100 किलोवाट की क्षमता का प्लांट लगाने का प्रोजेक्ट मिला है।
 
एबीईएस कॉलेज में लगेगा 30 किलोवाट का प्लांट
कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट ऑपरेशन डॉ. नीरजा जिंदल का कहना है कि कंपनी की ओर से एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज में 30 किलोवाट की क्षमता का प्लांट लगाया जाएगा। कॉलेज शोधार्थियों को प्रेरित करने और नए प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में यह कदम है। कॉलेज प्रबंधन से इस संबंध में बातचीत हो चुकी है।

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