एमएमजी में छत के टूटने से डेंगू-चिकनगुनिया और टाइफाइड की जांच हुई बंद, टाइफाइड के रोजाना आ रहे आठ से दस मरीज

संक्षेप:

  • एमएमजी की छत टूटने से स्टाफ में दहशत।
  • 15 दिन से डेंगू-चिकनगुनिया और टाइफाइड की जांच बंद।
  • टाइफाइड के रोजाना आ रहे आठ से दस मरीज।

गाजियाबाद. एमएमजी स्थित आईडीएसपी लैब की छत टूटने की वजह से डेंगू की जांच बंद है तो वहीं संयुक्त अस्पताल में केमिकल ना होने की वजह से टाइफाइड की जांच बंद है। डेंगू के जहां रोजाना चार से पांच नए मरीज आ रहे हैं। वहीं, टाइफाइड के भी रोजाना आठ से 10 मरीज आ रहे हैं।

हफ्ते में दो बार टूटकर गिरा छत का हिस्सा

संक्रामक रोग विभाग की आईडीएसपी लैब की छत का हिस्सा एक हफ्ते के अंदर दो बार टूटकर गिरने के बाद से स्टाफ दहशत में है। एक हफ्ते बाद अब लैब को दूसरे भवन में शिफ्ट किया जा रहा है। पिछले दो दिनों से डेंगू की जांच प्रभावित थी और अगले दो दिन और काम प्रभावित रहेगा। लैब में दो कमरे बने हैं जिसमें से मुख्य स्थान पर पैथोलॉजिस्ट बैठती हैं और वहीं डेंगू-चिकनगुनिया सहित पानी के सैंपल की जांच की जाती है। दूसरे कमरे में अन्य स्टाफ बैठता है। 10 दिन पहले लैब के एक कमरे की छत से लिंटर और सरिया टूटकर गिरा था और शनिवार को जिस कमरे में जांच होती है वहां की छत का हिस्सा टूटकर गिर गया। है। गंभीर मरीजों की जांच रैपिड किट से की जा रही है। लैब में रैपिट किट का स्टाक भी लगभग समाप्त है।

ये भी पढ़े : यूपी रोडवेज की साधारण बसों में अब मिलेगी रिजर्वेशन की सुविधा, ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों तरह से करा सकेंगे आरक्षण


टायफॉयड की जांच 15 दिनों से बंद

संयुक्त जिला अस्पताल स्थित लैब में पिछले 15 दिनों से टायफॉयड की जांच बंद है। कर्मचारियों का कहना है कि केमिकल नहीं आ रहे हैं जिसकी वजह से जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों को या तो निजी लैब में जांच करानी पड़ रही है या लक्षणों के आधार पर मरीजों का इलाज चल रहा है। यह लैब भी पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों तक लैब में रिजेंट ना होने की वजह से लिपिड प्रोफाइल, शुगर की जांच भी नहीं हो पा रही थी। सीएमएस डॉ. विनोद पांडेय ने बताया कि केमिकल की डिमांड भेजी गई है जल्द आने की संभावना है।

इंक्यूबेटर भी 15 दिनों से खराब

इसी लैब में पानी के सैंपल की जांच की जांच भी की जाती है। लेकिन पानी के सैंपल को स्टोर करके रखने वाला इंक्यूबेटर पिछले 15 दिनों से खराब पड़ा है। इंक्यूबेटर का दरवाजा पूरी तरह टूटकर निकल गया है। इसमें पानी के सैंपल को 35-37 डिग्री तापमान में रखा जाता है जिससे कि सैंपल खराब ना हों।

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Ghaziabad की अन्य ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें और अन्य राज्यों या अपने शहरों की सभी ख़बरें हिन्दी में पढ़ने के लिए NYOOOZ Hindi को सब्सक्राइब करें।

Related Articles