छोटे भाई ने बड़े भाई को बनाया बेवकूफ और हड़प ली बड़े भाई की सारी जमीन-जायदाद

संक्षेप:

बुलंदशहर: एक भाई ने दूसरे भाई को घर से बेदखल कर दिया, जमीन से बेदखल कर दिया और आज वो खुद पिता की मिल्कियत पर कब्जा जमाए बैठा है. कहानी तो यह मामूली सी लगती है, क्योंकि यह अमूमन हर घर की कहानी है कि भाई ही भाई का दुश्मन हो जाता है. लेकिन यहां भाई-भाई की दुश्मनी की कहानी थोड़ी अलग है. पिता के अनपढ़ होने का फायदा उठाया छोटे बेटे ने और सारी पैतृक जमीन अपने नाम करा ली. इतना ही नहीं उसने बड़े भाई लखमी चंद को भी अनपढ़ साबित कर दिया, जबकि बड़ा भाई लख्मी चंद अंग्रेजी में दस्तखत करता है और पासपोर्ट में बजाब्ते उसके अंग्रेजी में किए हस्ताक्षर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है.

दरअसल, गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी लखमी चंद्र ने 5 सितंबर 2018 को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को आवेदन देकर गुहार लगाई थी कि उन्हें अपने पिता की संपत्ति पर हक दिया जाए जो उसके छोटे भाई राधा चरण ने पिता और माता को धोखे में रख कर हड़प लिया था. छोटे भाई राधा चरण ने पिता कंछी राम के जीवित रहते ही पिता को ग्राम सभा से मिली 10 बीघे जमीन का दाखिल खारिज अपने नाम करवा ली थी. बड़े भाई लखमी चंद ने बताया कि जब पिताजी राधा चरण से पूछते थे कि बेटा जमीन का कागज दोनों भाइओं के नाम पर है कि नहीं तो राधा चरण हमेशा झूठ बोल देता था कि दाखिल खारिज दोनों भाइओं के नाम पर है. जबकि ये सच नहीं था. इतना ही नहीं छोटे भाई राधा चरण ने मां के नाम मिले 8 बीघे के पट्टे की जमीन का भा दाखिल खारिज अपने नाम करवा लिया.

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लखमी चंद्र ने बताया कि वो 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को भी आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी. उनके इस आवेदन पर त्वरित कार्रवाई भी हुई थी. पुलिस कार्यवाही हुई लेकिन राधा चरण ने पुलिस को रिश्वत देकर मामले को रफा-दफा कर दिया. लखमी चंद्र ने आरोप लगाया कि उसका भाई राधा चरण नाम बदल कर मयूर विहार फेज 1 मे 22 साल से प्रेस का काम कर रहा है, वो निहायत ही फर्जी इंसान है जो सरकार की आंख में धूल झोंक कर बेटे को सरकारी नौकरी दिलवाई है और खुद अखिलेश यादव के सरकार के समय बेरोजगारी पेंशन उठाता था. लखमी चंद ने यूपी की योगी सरकार से पैतृक संपत्ति दिलाने के लिए न्याय की गुहार लगाई है.

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