गाजियाबाद अस्पताल: 1 रुपये की पर्ची के लिए दौड़ता रहा पिता, मां की गोद में मासूम ने तोड़ा दम

संक्षेप:

  • दिल्ली से सटे गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल में सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं.
  • बेबस पिता 1 रुपये की पर्ची बनवाने के लिए 2 घंटे तक एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक दौड़ता रहा.
  • लेकिन जब तक पर्ची बनी तब तक उसका सवा महीने का बेटा मां की गोद में ही दम तोड़ चुका था.

गाजियाबाद: दिल्ली से सटे गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल में सोमवार को डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं. बेबस मरीज और तीमारदार इधर से उधर दौड़ते रहे, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पाया. बेबस पिता 1 रुपये की पर्ची बनवाने के लिए 2 घंटे तक एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक दौड़ता रहा, लेकिन जब तक पर्ची बनी तब तक उसका सवा महीने का बेटा मां की गोद में ही दम तोड़ चुका था. दरअसल, पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के समर्थन में जिले के तमाम नर्सिंग होम्स और निजी अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर थे. आलम यह हुआ कि सैकड़ों की संख्या में लोग उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे. डासना मसूरी के बसंतगढ़ी गांव निवासी इरशाद अपने सवा महीने के बच्चे को लेकर इमरजेंसी के बाहर लाइन में लगे थे. जब नंबर आया तो डॉक्टर ने पर्ची मांगी. इरशाद ने बच्चे की तबीयत ज्यादा ख़राब होने का हवाला दिया और कहा कि इलाज शुरू करें मैं बाद में पर्ची बनवा लूंगा. लेकिन डॉक्टर नहीं माने और पर्ची लाने की बात कही.

दो घंटे लगे पर्ची बनने में

इसके बाद इरशाद पर्ची बनवाने गए और दो घंटे बाद उन्हें पर्ची मिल सकी. इस बीच मासूम मां की गोद में दम तोड़ चुका था. बच्चे की मौत के बाद परिवार वाले रोते-बिलखते रहे, लेकिन वहां से गुजर रहे डॉक्टरों ने उनकी सुध तक नहीं ली. इरशाद ने बताया कि बच्चे का शरीर नीला पड़ गया था. वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे. इमरजेंसी में डॉक्टरों ने पर्ची के साथ बाल रोड विशेषज्ञ की ओपीडी में जाने को कहा. वहां लंबी लाइन लगी थी. बच्चे को मां के साथ लाइन में लगाकर वो पर्चा बनवाने गए. हड़ताल की वजह से वहां भी लाइन काफी लंबी थी. किसी तरह आधे घंटे बाद जब वह पर्ची बनवाकर लौटे तो चिकित्सक ने बच्चे की हालत गंभीर होने का हवाला देते हुए उसे दोबारा इमरजेंसी में ही दिखाने के लिए भेज दिया. दोबारा जब वह इमरजेंसी पहुंचे तो डॉक्टर ने उन्हें बच्चे की हालत बेहद गंभीर बताते हुए किसी दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया, लेकिन लिखित में रेफर नहीं किया.

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बिना लिखित दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया

ऐसे में दंपति खुद ही अपने सवा महीने के बच्चे को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा. जहां बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में जाने से पहले उन्हें एक बार फिर पर्ची बनवाने के लिए बोल दिया गया. पिता के पर्ची बनवाकर लौटने तक बच्चे ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया. गोद में बच्चे के दम तोड़ने के बाद मां रुकसाना अस्पताल में ही बेहोश हो गईं.

सीएमओ गाजियाबाद डॉ. एनके गुप्ता ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है. एमएमजी अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ की जाएगी. उधर डॉ. रविंद्र राणा, सीएमएस, एमएमजी अस्पताल ने कहा कि इस मामले पर डॉक्टरों से पूछताछ की जाएगी. दंपती अगर लिखित में कोई शिकायत देगा तो कार्रवाई की जाएगी.

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