गाजियाबाद के डीएम ने स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर दिए निर्देश

संक्षेप:

  • डीएम ने स्कूल बस ड्राइवरों को जारी किए दिशा निर्देश
  • सभी बसों के लिये एक परिवहन मैनेजर तय होना चाहिये
  • बसों के अन्दर सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस लगवाए जाए

गाजियाबाद ने सभी स्कूलों को बस पीले रंग का होना चाहिये और उनके अगले और पिछले भाग पर लिखा होना चाहिये। ड्राइवर का नाम, पता, लाइसेंस नम्बर, बैज नम्बर, स्कूल और बस का टेलीफोन नम्बर, परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर तथा वाहन का रजिस्ट्रेशन नम्बर भिन्न रंग में बस के अन्दर और बाहर लिखा होना चाहिये।

प्रत्येक स्कूल द्वारा बसों के लिये एक परिवहन मैनेजर तय होना चाहिये। जो बसों में बच्चों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार हो। स्कूल की प्रत्येक बसों के अन्दर सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस लगवाए जाए। हर स्कूल बस में एक स्कूल टीचर अवश्य होनी चाहिये, जो सभी बच्चों को बस से उतारने कि जिम्मेदारी ले सके। बस चलाते समय बस ड्राइवर को मोबाईल फोन का प्रयोग करने पर प्रतिबंध होगा ।

स्कूल परिसर का ऐसा स्थान जो अधिकांश समय खाली रहता हो वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाए, स्कूल परिसर में अग्निशमन यंत्र लगाया जाए तथा अग्निशमन विभाग से उसकी एनआरसी भी प्राप्त की जाए। स्कूल में इमरजेंसी मेडिकल किट अवश्य उपलब्ध होना चाहिये। स्कूल के समस्त स्टॉफ का पुलिस द्वारा सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाना चाहिये। स्कूल में सफाई कर्मचारी की आईडी हमेशा उनके पास होना चाहिये। साथ ही इसका पुलिस के द्वारा वैरिफिकेशन भी अवश्य होना चाहिये।

स्कूल के कॉरिडोर और कक्षाओं में पर्याप्त साफ-सफाई की जाए, स्कूल सेफ्टी कमेटी का गठन किया जाए। साथ ही इसकी सूचना जिला विद्यालय निरीक्षक को अवश्य कराई जाए। बिना शिक्षक के बच्चों को स्कूल कैंपस में अकेले ना घूमने दिया जाए। साथ ही स्कूल में स्थित क्लास रूम तथा सीढ़ियों पर चिकनी टाईल्स या फर्श ना बनवाया जाए।

इसके साथ ही स्कूल में छात्र-छात्राओं के टॉयलेट अलग-अलग होने चाहिये। कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए टॉयलेट ब्लॉक में साथ जाने के लिये एक महिला कर्मी की तैनाती जरूर होनी चाहिये। स्कूल के टॉयलेट की नियमित साफ सफाई महिला कर्मचारी द्वारा की जाए। टॉयलेट गेट तक अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाए और स्कूल के स्टाफ का टॉयलेट अलग रखा जाए। बाहर से आने वाले लोगों के उपयोग हेतु टॉयलेट की अलग व्यवस्था की जाए।

स्कूल में बिजली सुरक्षा का अच्छे से इंतजाम किया जाए और पीने के पानी की उचित व्यवस्था की जाए। डे-बोर्डिंग स्कूलों में खान-पान संबंधी वस्तुओं की जांच नियमित रूप से किया जाए, साथ ही नाश्ता या खाना स्कूल के प्रभारियों को खिलाने के बाद ही छात्र-छात्राओं में दिया जाए। स्कूल की बाउण्ड्री उंची होनी चाहिये तथा उसपर कटीले तार लगवाए जाने चाहिये।

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