गाजियाबाद में दारोगा के खुदकुशी का मामला, पत्नी बोली- हुई है हत्या

संक्षेप:

  • अलीगढ़ के दारोगा ने गाजियाबाद में ऐसे की थी खुदकशी
  • पत्नी बोली हुई है हत्या
  • कांस्टेबल के साथ रहते थे दारोगा

गाजियाबाद: गाजियाबाद के कविनगर थाने में तैनात दारोगा विजय कुमार ठेनुआ (43) ने बुधवार सुबह अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार कर जान दे दी। वे अलीगढ़ जिले की इगलास तहसील के नाया गांव के मूल निवासी थे।

देर रात शव आने पर पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस आत्महत्या के कारणों की पड़ताल में जुटी है, जबकि पत्नी किरन ने साजिशन हत्या का आरोप लगाया है।

कविनगर थाना प्रभारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मार्च 2016 में विजय की तैनाती गाजियाबाद हुई। थाना परिसर में बने स्टाफ क्वार्टर में हेड कांस्टेबल सैयद इमाम अख्तर जैदी के साथ रहते थे। कुछ समय से डिप्रेशन में बताए जा रहे थे। परिवार मथुरा में रह रहा है। वहां अप्रैल में उनके व एक दोस्त के खिलाफ बलवा की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें दो दिन पहले ही समझौता हो गया। मंगलवार रात की ड्यूटी कर तड़के चार बजे क्वार्टर पर पहुंचे। करीब पौने सात बजे जोरदार आवाज हुई, जिसके चलते कमरे में सो रहे इमाम जैदी की नींद खुली। सामने विजय लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़े थे।

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इमाम जैदी के मुताबिक, विजय ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर को दाईं ओर से कनपटी पर रखकर गोली चलाई, जोकि दूसरी तरफ निकल गई। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।  लगभग नौ बजे डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गाजियाबाद के कविनगर थाने में तैनात दारोगा विजय कुमार ठेनुआ की मौत को परिजन आत्म हत्या मानने को तैयार नहीं हैं। पत्नी कविता का कहना है कि यह साजिशन हत्या है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। रात करीब सवा आठ बजे शव जिले की इगलास तहसील के नाया गांव लाया गया।

विजय अलीगढ़ की तहसील इगलास के गांव नाया के मूल निवासी थे, लेकिन इनका परिवार मथुरा के बालाजी पुरम में रहता है। पिता महेंद्र सिंह की 2001 में हुई, जिनकी चार संतानों में यह इकलौती बेटे थे। 2010 मथुरा में पोस्टिंग होने के चलते वे परिवार के साथ वहां गए। तब सिपाही थे। इगलास निकट होने के चलते हीं मकान बनवाकर रहने लगे। 2013 में दारोगा बने। फिलहाल गाजियाबाद तैनात थे, लेकिन परिवार को मथुरा ही रखा। उनका बड़ा पुत्र शिवम 12 वीं और छोटा पुत्र रितिक 10वीं में पढ़ता है।  बुधवार सुबह मौत की खबर ने परिवार ही नहीं गांव के लोगों ने सकते में डाल दिया। उनकी पत्नी कविता यह मानने को तैयार ही नहीं हुई कि विजय अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार सकते हैं। उसका कहना है कि हर परिस्थिति से जूझने की हिम्मत वाला व्यक्ति ऐसा कदम नहीं उठा सकता। यह तो साजिशन हत्या है। जांच कराई जाए।

गांव के प्रधान नीरज चौधरी का कहना था कि विजय साहसी थे। व्यवहारिक थे। उनमें हर स्थिति से जूझने की हिम्मत थी, इसलिए आत्महत्या की बात नहीं मान सकते।

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