गोरखपुर हादसा में आरोपी डॉ सतीश कुमार ने किया कोर्ट में सरेंडर

संक्षेप:

  • बीआरडी में हुई बच्चों की मौत का मामला
  • डॉ सतीश कुमार ने कोर्ट में सरेंडर किया
  • डॉ कफील और डॉ राजीव मिश्रा जेल के पीछे

गोरखपुरः बीआरडी में हुई बच्चों की मौत के मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल डॉ सतीश कुमार ने कोर्ट मे सरेंडर कर दिया। दरअसल, डॉ सतीश के वकील ने अर्जी देकर 7 सिंतबर को कोर्ट में समर्पण करने की बात कही थी। दरअसल, उनके अधिवक्ता शंभुनाथ दुबे ने कोर्ट में अर्जी देकर सात सितंबर को समर्पण की अनुमति मांगी थी। जिसके बाद कोर्ट ने उनके वांछित होने के बारे में गुलरिहा थाने से रिपोर्ट मांगी थी।

वहीं, उनके हाजिर होने की खबर पाते ही पुलिस ने सक्रियता बढ़ा दी है, पुलिस की कोशिश है कि कोर्ट में दाखिल होने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता की तहरीर पर दर्ज केस में डॉ. सतीश भी आरोपी हैं। केस दर्ज होने के बाद नामजद नौ आरोपियों में से निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. पूर्णिमा शुक्ला और डॉ. कफील को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है,. लेकिन अभी भी कुछ आरोपी गिरफ्त से बाहर है।

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उनकी गिरफ्तारी के लिए आठ टीमें लगाई गई हैं। इसी बीच डॉ. सतीश ने हाईकोर्ट में भी अर्जी दी थी जो खारिज हो गई। इसके बाद उनके अधिवक्ता शंभुनाथ ने गोरखपुर कोर्ट में समर्पण की अर्जी दी है. इसके मद्देनजर कोर्ट ने दर्ज केस का ब्योरा मांगा है। इसके बाद पुलिस तक यह जानकारी पहुंच गई. पुलिस की पूरी कोशिश है कि वह कोर्ट के बाहर डॉ. सतीश को गिरफ्तार कर लें ताकि उनसे पूछताछ का मौका मिल जाए।

फरार आरोपियों के गुनाह और कार्रवाई

मनीष भंडारी

मनीष भंडारी लिक्विड ऑक्सीजन के सप्लायर पुष्पा सेल्स के डायरेक्टर हैं। आरोप है कि पुष्पा सेल्स ने ही जीवनरक्षक ऑक्सीजन की सप्लाई ठप की थी। मनीष भंडारी के घर विवेचक सीओ कैंट भी छापा डाल चुके हैं। सूत्र बताते है कि इस दौरान अहम दस्तावेज भी पुलिस को मिले हैं। मनीष से भी विवेचना में सहयोग की बात कही गई थी, पर वह नहीं आए।

गजानन जायसवाल

पीपीगंज क्षेत्र के जंगल कौड़िया निवासी गजानन जायसवाल मेडिकल कॉलेज में चीफ फर्मासिस्ट हैं। डॉ. सतीश कुमार की मदद में इनकी ड्यूटी थी। उन पर ऑक्सीजन की उपलब्धता, लाग बुक, स्टाक बुक दुरुस्त रखने का जिम्मा था। आंकड़ों में खेल कर कमीशन कमाने का आरोप है। पुलिस इनके घर भी दस्तक दे चुकी है।

उदय प्रताप शर्मा

गुलरिहा थाना क्षेत्र के झुंगिया निवासी उदय प्रताप शर्मा लेखा विभाग में तैनात रहे। पिता अनिरुद्ध की मौत के बाद उनकी जगह पर नौकरी मिली थी। आरोप है कि कमीशन के चक्कर में इन्हीं ने भुगतान की फाइल नहीं तैयार की थी। पुलिस ने चार बार इनके घर दबिश दे चुकी है। केस दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहे हैं।

संजय कुमार त्रिपाठी

शाहपुर के रामनगर कॉलोनी निवासी संजय कुमार त्रिपाठी भी लेखा विभाग में रहे। उनके पिता केके त्रिपाठी भी मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी थे। इनको भी पिता की जगह नौकरी मिली थी। इन पर भी कमीशन के लिए भुगतान में देरी का आरोप है। इनके घर व रिश्तेदार के यहां पुलिस दबिश दे चुकी है।

सुधीर कुमार पांडेय

पिपराइच थाना क्षेत्र के नारायनी नगर में सुधीर कुमार पांडेय का मकान है। इनके पिता भी मेडिकल कर्मचारी थे। कमीशन के लिए सेंटिंग करने के अलावा पत्रावली को देरी से पेश करने का आरोप है। इसी आधार पर पुलिस ने इनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

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