गोरखपुरः नया शैक्षणिक सत्र में नहीं मिल रहे अंग्रेजी विद्यालयों को शिक्षक

संक्षेप:

  • अंग्रेजी विद्यालयों को नहीं मिल रहे शिक्षक
  • सरकारी अंग्रेजी स्कूलों को नहीं मिल रहे शिक्षक
  • नया सत्र से सरकारी स्कूल में अंग्रेजी पढ़ना अनिवार्य किया गया है

गोरखपुर : शैक्षणिक सत्र का दूसरा सेशन भी शुरू हो गया है लेकिन अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के संचालन का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। कांवेंट विद्यालयों को टक्कर देने की मंशा वाली यह योजना शिक्षकों की उदासीनता की वजह से सफल होती नहीं दिखाई दे रही है। शिक्षकों की उदासीनता के साथ विभाग की शुरुआती शिथिलता भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।

गोरखपुर में 102 विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम के रूप में चलाना है लेकिन 74 के लिए ही किसी तरह शिक्षकों की व्यवस्था की जा चुकी है। शिक्षक योग्यता परीक्षा की मेरिट को न्यूनतम स्तर तक घटाने के बाद भी करीब सवा सौ शिक्षक ही मिल सके हैं। 28 विद्यालयों को अभी एक भी शिक्षक नहीं मिल सके हैं और नए चयन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून को ही समाप्त हो चुकी है।

शासन ने बेहतर शिक्षा के लिए चुनिंदा परिषदीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया था। इन विद्यालयों में शिक्षकों का चयन करने को अर्हता परीक्षा आयोजित की गई। तीन चरणों की इस परीक्षा में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक मिलाकर मात्र 86 शिक्षक ही अर्ह पाए गए।

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तैनाती स्थल ब्लाक के भीतर करने के स्थानीय आदेश के कारण कई शिक्षकों ने अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों से दूरी बना ली। इसके बाद शिक्षकों की उपलब्धता के लिए परीक्षा परिणाम की मेरिट को न्यूनतम स्तर तक गिरा दिया गया, फिर भी अपेक्षित संख्या नहीं मिल सकी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने और शिक्षकों के लिए नया आवेदन आमंत्रित किया लेकिन इसमें अंतिम तिथि बीत जाने तक करीब 100 आवेदन ही प्राप्त हो चुके हैं। अब आवेदन की तिथि को और बढ़ाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री श्रीधर मिश्र का कहना है कि पहले तो प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में ही देना उचित होता। यदि शासन ने फैसला कर ही लिया तो ऐसे विद्यालयों का चयन करना चाहिए था, जहां आधारभूत संरचना दुरुस्त थी। पर, विद्यालयों का चयन ठीक से नहीं किया गया, इसमें मनमानी करते हुए जर्जर और अति पिछड़े क्षेत्रों के विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम के रूप में चुन लिया गया। यहां जाने के लिए शिक्षकों को कोई अतिरिक्त पारिश्रमिक का प्रावधान भी नहीं है। ऐसी ही तमाम समस्याओं के कारण शिक्षक इसमें रुचि नहीं ले रहे।

अंग्रेजी विद्यालय- अब तक की स्थिति

जनपद में चयनित अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय- 102

शिक्षकों की जरूरत- 510 (102 प्रधानाध्यापक और 408 सहायक अध्यापक)

अब तक संचालित विद्यालय - 74

और शिक्षकों की आवश्यकता - 300 से अधिक

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