गोरखपुर का घंटाघर समेटे हुए है वीर बलिदानियों की गौरव गाथा, जानिए इसका इतिहास

संक्षेप:

  • गोरखपुर में घंटाघर का इतिहास है बहुत पुराना।
  • 1930 में निर्मित हुआ था ये घंटाघर।
  • राम प्रसाद बिस्मिल की यहां रुकी थी शवयात्रा।

गोरखपुर. गोरखपुर महानगर के हिंदी बाजार में स्थित घंटाघर स्वतंत्रता आंदोलन के वीर बलिदानियों के शहादत की गौरव-गाथा को अपने भीतर समेटे हुए है। वर्तमान में जहां यह घंटाघर है वहां 1857 में एक विशाल पाकड़ का पेड़ हुआ करता था। इसी पेड़ पर पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अली हसन के साथ दर्जनों स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी। वहीं महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की शव यात्रा भी यहां रुकी थी। यहीं उनकी मां ने एक प्रेरणादायी भाषण दिया था।

बिस्मिल की शवयात्रा यहीं आकर रूकी थी

दरअसल, 19 दिसंबर 1927 में जब जिला कारागार में बिस्मिल को फांसी दी गई तो शहर में निकली उनकी शवयात्रा इसी घंटाघर पर आकर रुकी थी। उसी दौरान बिस्मिल की माता ने यहां पर प्रेरणादायी भाषण भी दिया था। इस घटना के बाद यह स्थान पूरी तरह से पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को समर्पित हो गया।

ये भी पढ़े : तेज आंधी के कारण भूल भुलैया के ऊपरी गुम्बद गिरा, गुम्बद के चपेट में आकर इमामबाड़े का एक गाइड हुआ घायल


1930 में हुआ था घंटाघर का निर्माण

घंटाघर के निर्माण का श्रेय रायगंज के सेठ राम खेलावन और सेठ ठाकुर प्रसाद को जाता है। उन्होंने 1930 में अपने पिता सेठ चिगान साहू की याद में इसी स्थान पर मीनार की तरह ऊंची इमारत का निर्माण कराया, जो देश के शहीदों को समर्पित थी।

सेठ चिगान के नाम पर काफी दिनों तक इस इमारत को चिगान टॉवर भी कहा जाता रहा।  इमारत पर घंटे वाली घड़ी लगाई गई, जिसकी वजह से बाद में यह इमारत घंटाघर के नाम से मशहूर हो गई।

दीवारों पर अंकित है घंटाघर के निर्माण की कहानी

घंटाघर के निर्माण की कहानी हिंदी और उर्दू भाषा में घंटाघर की दीवारों पर अंकित है। वहीं दीवार पर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की तस्वीर भी लगी है।

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

अन्य गोरखपुर की अन्य ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें और अन्य राज्यों या अपने शहरों की सभी ख़बरें हिन्दी में पढ़ने के लिए NYOOOZ Hindi को सब्सक्राइब करें।

Related Articles