गोरखनाथ शोध पीठ का सीएम योगी ने किया शिलान्यास, जानिए कौन बने पहले सदस्य?

संक्षेप:

  • गोरखनाथ शोध पीठ का सीएम योगी ने किया शिलान्यास
  • अब ऑनलाइन भी ली जा सकती है सदस्यता
  • यूजीसी के चेयरमैन प्रोफेसर डीपी सिंह बने पहले सदस्य

गोरखपुर: गोरखपुर में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ शोध पीठ का शिलान्यास किया. अब पीठ की सदस्यता ऑनलाइन भी ली जा सकती है. यूजीसी के चेयरमैन प्रोफेसर डीपी सिंह और डीडीयू के कुलपति प्रोफेसर वीके सिंह को पीठ की ओर से पहला आजीवन सदस्य बनाया गया है.

गोरखनाथ शोध पीठ की स्थापना यूपी सरकार का संस्कृति मंत्रालय और दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय मिलकर करेंगे. इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि भारत के अतीत पर नजर डालिये तो मिलेगा की वह दुनिया को धार्मिक नेतृत्व दिया है. पिछले चार वर्षों से यूएनओ ने पीएम मोदी की पहल पर योग को वैश्विक मान्यता दी है जो जीता जागता प्रमाण है. यह आध्यात्मिक चेतना की देन है. 

उन्होंने कहा कि गुरु गोरक्षनाथ ने कहा कि मनुष्य के अंदर सारा ज्ञान छिपा है, बस उसे जाग्रत करने की जरूरत है.  डीडीयू ने 60 वर्षों के समय में देश को महान विभूतियों को दिया है. उन्होंने कहा कि महा योगी गुरुगोरक्षनाथ शोध पीठ योग से लेकर अध्यात्म तक की महत्ता को स्थापित करेगा.

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साथ ही उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में भ्रमण के बाद उन्हें गुरुगोरक्षनाथ के अनुयायियों और मानने वालों की जब जानकारी मिली और ऐसे लोगों को देखा तो यह आवश्यक हो गया कि एक ऐसी पीठ की स्थापना हो जिससे लोग उनसे जुड़ सके और शोध को पूरा कर सकें. सीएम ने इस दौरान शोध पीठ के अधिशासी समिति के सदस्य डॉ प्रदीप राव की किताब नाथ पंथ का विमोचन कर पीठ की भूमिका का भी शुभारंभ किया.

इस दौरान यूजीसी के चेयरमैन प्रो0 धीरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि आज मुझे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्थापना का काल याद आता है. वह भी एक संत के अगुवाई में हुआ था। उन्होंने कहा कि आज दौर में विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ धार्मिक विकास की भी जरूरत है. यह मानसिक शांति प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि यूजीसी ने उनके नेतृत्व में हर विश्वविद्यालय को निर्देशित किया है कि वह अपने परिक्षेत्र के 5 गांवों का सर्वांगीण विकास का कार्य करें.

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