यूपी की इस सीट को जीतकर बीजेपी अंदर-बाहर कईयों को संदेश देना चाहती

गोरखपुर संसदीय सीट पर भाजपा फिर से परचम लहराने की जुगत में लग गई है।

तीन दशक से योगी आदित्यनाथ के प्रभाव क्षेत्र वाली इस लोकसभा सीट को उपचुनाव में गंवाना भाजपा को गंवारा नहीं हो रहा है।

सीट पुनः बीजेपी के पास आ जाए इसके लिए जातीय समीकरण साधने के साथ दर्जनों बड़ी परियोजनाओं को गोरखपुर में लाकर लोगों को सीधे तौर पर लुभाने की कोशिशें जारी है।

हालांकि, विपक्ष भी सरकार की खामियां और विफलता को उजागर कर गढ़ में ही सेंधमारी का कोई मौका गंवा नहीं रहा है।

तीन दशकों से गोरखपुर संसदीय सीट पर रहा है मंदिर का कब्जा

गोरखपुर संसदीय सीट गोरखनाथ मंदिर के प्रभाव क्षेत्र वाली सीट है।

इस सीट पर आजादी के बाद अबतक 17 बार चुनाव हुए हैं इसमें दस बार मंदिर में जीत की जश्न मनाई गई।

गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ मंदिर का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले सांसद रहे।

उनके निधन के बाद खाली हुई संसदीय सीट पर उनके उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ ने उपचुनाव लड़कर जीत हासिल की।

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