गोरखपुर के लोगों को अब गैस पाइप लाइन के जरिये मिलेगी गैस, रेट भी होगी 50 फीसद कम

संक्षेप:

  • गैस पाइप लाइन आने का सपना अब होने वाला है पूरा
  • 6.5 किलोमीटर की दूरी में कार्य रह गया है शेष
  • फरवरी तक कर दी जाएगी गैस की आपूर्ति

गोरखपुर: गोरखपुर के लोगों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। दरअसल गोरखपुर में गैस पाइप लाइन आने का सपना अब पूरा होने वाला है। समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के लिए सभी निर्माण कार्यदायी संस्थाएं जुटी हुई हैं।

गैस पाइप लाइन का कार्य देख रही `गेल` फरवरी तक खाद कारखाने को गैस की आपूर्ति देने के लिए जी-जान से जुटी हुई है। अब नदियों को छोड़कर सिर्फ 6.5 किलोमीटर की दूरी में कार्य शेष रह गया है। गेल का दावा है कि हर हाल में खाद कारखाने को फरवरी तक गैस की आपूर्ति कर दी जाएगी।

गैस पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया खाद कारखाने के पास तक पहुंच चुकी है। आजमगढ़ से गोरखपुर तक कुल 84 किलोमीटर में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। जिसमें से लगभग पांच किलोमीटर बेलघाट में टीकापुर से चौरिया तक विवाद के चलते कार्य रुका था, डीएम के आदेश पर वहां शुक्रवार को काम शुरू हो गया।

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इसी तरह लगभग डेढ़ किलोमीटर जंगल बहादुरपुर में पानी लगने की वजह से कार्य शुरू नहीं हो पाया है। डीजीएम गेल एनके सिंह के अनुसार ये दोनों कार्य 15-20 दिन में पूरे कर दिए जाएंगे। घाघरा नदी में एचडीडी (नदी के नीचे से पाइप लाइन निकालने की प्रक्रिया) शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया में मशीन के द्वारा नदी में 25 मीटर नीचे से पाइप खींचकर उसपार की जाती है। इसके बाद राप्ती व रोहिन पर काम शुरू होगा। घाघरा व राप्ती में दो-दो किलोमीटर व रोहिन में 300 मीटर की दूरी पार करनी है।

भले ही इसमें समय लगे, लेकिन खाद कारखाने के बहाने अब गोरखपुर के निवासियों को आसानी से गैस मिल सकेगी वह भी लगभग 50 फीसद कम रेट पर। इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। प्रतिदिन पांच मिलियन टन गैस की आपूर्ति होगी, जिसमें से लगभग ढाई मिलियन टन खाद कारखाने में उपयोग होगा, शेष ढाई मिलियन टन आम शहरियों के उपयोग में आएगा।

डीजीएम गेल एनके सिंह ने बताया कि गैस पाइपलाइन बहुत ही सुरक्षित है। यह बहुत मोटी पाइप होती है और जमीन के अंदर होती है। इसमें जगह-जगह वाल्व लगे होते हैं, वहां एक इंडीकेटर भी होता है। हर 16 किमी पर हमारा एक स्टेशन होता है जो लोकल स्तर पर कंट्रोल रूम से मॉनीटरिंग करता है। इसके अलावा नोएडा स्थित सेंट्रल कंट्रोल रूम में भी लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। कोई वाल्व खराब हुआ या कहीं से गैस लीक की तो तत्काल स्थानीय व सेंट्रल कंट्रोल रूम को पता चल जाता है और तत्काल उसे ठीक करा दिया जाता है। यही नहीं खाद कारखाने के बहाने पूर्वांचल को अब इतनी गैस आपूर्ति हो सकेगी कि यहां सीएनजी गाडिय़ां चलने लगेंगी।

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