गोरखपुर पर्यटकों की पहली पंसद हैं ‘ होटल विवेक’

  • Pinki
  • Tuesday | 9th May, 2017
संक्षेप:

  • 1990 में होटल विवेक की हुई स्थापना
  • 1994 में डायरेक्टर अचिन्त लाहड़ी ने संभाला पदभार
  • NYOOOZ के साथ खास बातचीत में दी जानकारी

गोरखपुरः आजकल की पीढ़ी को घूमना बेहद पंसद हैं। वहीं सरकार भी टूरिज्म को बढ़ावा देने की हर कदम उठा रही हैं। घूमने के दौरान टूरिस्ट का सबसे पहली परेशानी होती हैं होटल का चयन करना, क्योंकि हर टूरिस्ट चाहता हैं कि उसे होटल बजट में और बेहतर सुविधाओं के साथ मिले। इन्हीं टूरिस्ट की इच्छाओं को पूरा करता गोरखपुर का ‘होटल विवेक’... हमने इस होटल के बारे में जानने की कोशिश की। होटल विवेक की स्थापना 1990 में डायरेक्टर अचिन्त लाहड़ी के पिता पी.के लाहड़ी ने की थी। होटल मैनेजमेंट के बाद 1994 से अचिन्त लाहड़ी ने बतौर डायरेक्टर पदभार संभाला.. अचिन्त लाहड़ी ने NYOOOZ के साथ खास बातचीत में क्या कहा, आईये जानते हैं।  

सवाल - होटल की शुरुआत कब की थी ?

जवाब- होटल पहले से चल रहा है, होटल मैनेजमेंट करके 1994-95  से.. मैं यहां आया उसके बाद, मैं इस होटल के साथ जुड़ा हुआ हूं, उसी समय 1995-96  में इसका विस्तार हुआ है।

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सवाल- होटल को शुरू करने में क्या-क्या दिक्कतें आई?

जबाब- देखिए होटल व्यवसाय गोरखपुर में डेवलप नहीं है, इसलिए इस जॉब में चैलेंज है, जैसे यहां पर ट्रेंड मेन पॉवर नहीं मिलता हैं। ट्रेंड इंप्लाइज नहीं मिलते, यहां पर बहुत सामान उपलब्ध नहीं है। सारी सामान बाहर से मंगवाने पड़ते है। अब धीरे-धीरे यहां पर सिचुएशन्स में सुधार आने लगा हैं। होटल गोरखपुर टूरिस्ट के पंसदीदा की लिस्ट में शामिल होने लगा हैं, ज्यादातर टूरिस्ट हमारे ही होटल में आना पंसद करते हैं।

सवाल- होटल की  कहां से शुरुआत की थी और कहां तक पहुंचे हैं?

जबाब- शुरुआत बहुत ही छोटे से जगह से हुई थी होटल की, इस शहर में पहचान है। यही इसकी उपलब्धि है। पहले टूरिस्ट लोगों को होटल के बारे में बताने के लिए हम टूरिस्ट के बीच जाते थे और उन्हें अपने होटल में ठहरने के लिए हरसंभव कोशिश करते थे, लेकिन हमारी इस मेहनत से होटल का नाम रोशन होता गया और आज के दौर में भारी संख्या में टूरिस्ट हमारे होटल में रूकना पंसद करते हैं। कभी- कभी तो हमारे होटल में बुकिंग फुल होती हैं।

सवाल- आपके होटल में ऐसा क्या खास है, जिससे टूरिस्ट आपके होटल को पंसद करते हैं?

जबाब- सबसे पहले तो हमारे होटल की लोकेशन ही बहुत ही अच्छी है, लोकेशन के साथ-साथ ही एरिया भी है वह सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। जो ट्रेवलर है गोरखपुर में जो लोग आते हैं, 95% कॉरपोरेट ट्रेवलर होते हैं जो कॉर्पोरेट ट्रेवलर होते हैं उसे डिस्टर्ब नहीं पसंद करते। वहीँ होटल में आते ही हैं और ट्रेवलर से आते हैं फूड क्वॉलिटी बहुत ही अच्छी है। वैरायटी की सारी फैसिलिटी है। इसमें हमारे स्टॉफ और उनके कार्य का सबसे बड़ा योगदान हैं।  

सवाल-  होटल में आने वाले कुछ लोग अपने पद का रुतवा दिखाते हैं?

जवाब- पद का रुतवा तो लोगों ने नहीं दिखाया हैं, लेकिन यह बात सच है कि हर व्यक्ति की अपेक्षा होती है कि वह जो कि हर व्यक्ति को अलग-अलग पसंद होती है। इस तरह से बहुत से चैलेंज जाते हैं। होटल में सारे कस्टमर बाहर से आते हैं, लोकल आदमी रूम नहीं लेगा, नहीं बाहर से आने वाला। लोगों की पसंद के हिसाब से सर्विस देनी पड़ती है। इसलिए रूतवा नहीं कह सकते हैं, उनकी अपेक्षाएं हमसे ज्यादा होती हैं, जो हम पूरी करने की भरपूर कोशिश करते हैं।

सवाल- सरकार की कुछ पॉलसी में सर्विस टैक्स एक है, इस बारे में क्या कहना चाहेंगे ?

जबाब- देखिए सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज अलग-अलग हैं, सर्विस टैक्स तो देना ही है। सर्विस चार्ज होटल के मैनेजमेंट के ऊपर है वो लेंगे की नहीं, उनके ऊपर होता हैं। हमारा होटल सरकार के बनाये गए नियमों का, पॉलिसी को फॉलो करता हैं, हमारी होटल की ये भी एक विशेषता हैं।

सवाल- न्यूज़ के माध्यम से जनता से क्या कहना चाहेंगे?

जबाब- देखिए, जनता ही टूरिस्ट है और टूरिस्ट ही जनता हैं, इसलिए मेरी जनता से यही अपील है कि टूरिज्म को बढ़ावा दें, गोरखपुर में ऐसे पर्यटन स्थल है जिनके बारे में शायद ही लोगों को जानकारी हो, नई जनरेशन पर्यटन के क्षेत्र में क्षेत्र को विकसित करें, शहर को साफ रखें।

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