बीजेपी के लिए राजभर से ज्यादा जरूरी क्यों हुए निषाद!

कई दिनों तक चले राजनीतिक ड्रामे के बाद निषाद पार्टी आखिरकार उत्तर प्रदेश में एनडीए का हिस्सा बन ही गई लेकिन लगातार दबाव बनाने के बाद भी 2017 के विधानसभा के चुनावों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सहयोगी रही सुहेलदेव समाज पार्टी की बात बनती नजर नहीं आ रही है. बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो सुहलदेव समाज पार्टी के नेता और राज्य सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बेटे को राज्य मंत्री का दर्जा देने के बाद पार्टी ने उनको साफ संकेत दे दिया है कि लोकसभा चुनावों में बीजेपी उनकी पार्टी को कोई सीट नहीं देने जा रही है. इसके बाद गठबंधन में रहने या ना रहने का फैसला उनका है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बीजेपी के लिए 2017 से 2019 आते-आते निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद सुहलदेव समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर से ज्यादा महत्वपूर्ण कैसे हो गए? इस सवाल का जवाब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बाद हुए लोकसभा उप चुनावों में में छिपा है, इस उप चुनाव में बीजेपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर दोनों लोकसभा सीटें हार गई थी. ओम प्रकाश राजभर बात करें गोरखपुर की तो गोरखपुर में करीब 19.5 लाख मतदाता हैं. 3.5 लाख वोटों के साथ निषाद मतदाताओं की संख्या इस सीट पर सबसे ज्यादा है उसके बाद नंबर आता है दलित और यादव वोटरों का. लोकसभा उप चुनाव में गोरखपुर सीट पर बीजेपी की हार का कारण यही वोट गणित था. गोरखपुर लोकसभा सीट पर ठाकुर और ब्राह्मण वोटरों की संख्या 2-2 लाख के करीब है. लोकसभा उप चुनाव को छोड़ दें तो निषाद पंरपरागत रूप से बीजेपी का वोटर रहा है.योगी ने एक तीर से साधा दो निशाना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कभी भी नहीं चाहेंगे कि 2019 के चुनाव में उनकी परपंरागत गोरखपुर लोकसभा सीट से बीजेपी को हार का सामना करना पड़े, ऐसे में निषाद वोटरों को अपने पाले में लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. पार्टी में ऐसा कोई बड़ा नेता नहीं था, जिसका कद निषाद वोटरों में संजय निषाद के आस-पास भी हो ऐसे में योगी आदित्यनाथ को निषाद पार्टी से गठबंधन का रास्ता आसान लगा, जिसे पार्टी ने सहमति दे दी. योगी आदित्यनाथ ने यहां एक तीर से दो निशाना साधा. परंपरागत निषाद वोटर बीजेपी के साथ आए और ये सीट ब्राह्मण कोटे में जाने से भी बच गई. इसका सीधा मतलब ये हुआ कि जब भी योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की राजनीति से देश की राजनीति में रुख करते हैं तो गोरखपुर लोकसभा सीट उनके लिए खाली मिलेगी.Loading... (function(){var D=new Date(),d=document,b='body',ce='createElement',ac='appendChild',st='style',ds='display',n='none',gi='getElementById',lp=d.location.protocol,wp=lp.indexOf('http')==0?lp:'https:';var i=d[ce]('iframe');i[st][ds]=n;d[gi]('M370080ScriptRootC285148')[ac](i);try{var iw=i.contentWindow.document;iw.open();iw.writeln(''+'dy>'+'ml>');iw.close();var c=iw[b];}catch(e){var iw=d;var c=d[gi]('M370080ScriptRootC285148');}var dv=iw[ce]('div');dv.id='MG_ID';dv[st][ds]=n;dv.innerHTML=285148;c[ac](dv);var s=iw[ce]('script');s.async='async';s.defer='defer';s.charset='utf-8';s.src=wp+'//jsc.mgid.com/h/i/hindi.news18.com.285148.js?t='+D.getYear()+D.getMonth()+D.getUTCDate()+D.getUTCHours();c[ac](s);})();राजभर पर भारी कैसे पड़े निषाद इन सबके बाद सवाल ये कि आखिर ओम प्रकाश राजभर के साथ गंठबंधन कर जिस राजभर वोटों के सहारे बीजेपी ने 2017 में पूर्वांचल में अपनी बढ़त बनाई थी सिर्फ 2 साल में ही वो पार्टी के लिए अनुपयोगी कैसे हो गई? इस सवाल का जवाब 29 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गाजीपुर और वाराणसी में हुई रैलियों से मिल जाएगा. राजभर वोटरों के बाहुल्य वाले इलाके में हुई उस रैली में सुहलदेव समाजपार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को मंच पर जगह नहीं मिली जबकि मंच पर मौजूद राज्य सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों को दरकिनार कर राज्य मंत्री अनिल राजभर को बोलने का मौका दिया गया. FILE PHOTO प्रधानमंत्री ने भी अपने भाषण की शुरुआत महाराज सुहेलदेव के नारे से की. साफ है बीजेपी ने उस दिन ही ओम प्रकाश राजभर को ये संकेत दे दिया था कि पार्टी ने अपना राजभर नेता चुना लिया है लेकिन निषाद वोटरों के मामले में हालात ऐसे नहीं थे. पार्टी ने अपने इंटरनल फ्रंट पर लगातार कोशिश की लेकिन संजय निषाद का कोई विकल्प नजर नहीं आया. निषाद वोटरों का प्रभाव पूर्वाचंल में गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया, खलीलाबाद, मऊ, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी समेत 10 सीटों पर है और निषाद पार्टी के साथ गठबंधन में रहने से एसपी-बीएसपी गठबंधन को इसका सीधा फायदा मिल रहा था. ऐसे में बीजेपी को निषाद पार्टी से गठबंधन ही सबसे आसान रास्ता नजर आया.यह भी पढ़ें: अखिलेश का घोषणापत्र : सरकार बनी तो सामाजिक न्‍याय के लिए अमीर 'सवर्णों' पर लगाएंगे टैक्सयह भी पढ़ें: सहारनपुर में PM-'आतंकियों को पता है, मोदी पाताल में भी सजा देगा'यह भी पढ़ें: गोरखपुर में बोले जेपी नड्डा- 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी को मिलेगी एकतरफा जीत।

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