ग्वालियर व्यापार मेल से खोता जा रहा है अपना वैभव, 500 से घटकर 150 करोड़ पर सिमट गया कारोबार

ग्वालियर

विधानसभा चुनाव की विजय यात्रा में लगे कांग्रेस और भाजपा सहित अन्य दलों के नेता अंचल के 20 हजार लोगों की रोजी रोटी से सीधे जुड़े ग्वालियर व्यापार मेले का वैभव लौटाने के लिए प्रयास नहीं कर पाए हैं।

पंद्रह साल में शिखर पर पहुंचे नेताओं ने मेले को अनदेखा कर दिया।

डेढ़ दशक पहले तक जिस मेले का व्यवसाय 500 करोड़ रुपए के आंकड़े को छूता था, वह अब 150 से 200 करोड़ रुपए तक सिमट कर रह गया है।

प्रदेश सरकार ने पांच साल में संचालक मंडल तक का गठन नहीं किया है, जिससे मेले पर हर साल अफसरशाही हावी रहती है।

टैक्स छूट बंद होना अरुचि की वजह सिंधिया परिवार द्वारा 107 साल पहले पशु मेले के रूप में शुरू किए गए व्यापार मेले से बड़े व्यवसाइयों की अरुचि का बड़ा कारण सरकार द्वारा दी जानी वाली टैक्स छूट बंद करना माना जा सकता है।

2003 में जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ तो मेले में टैक्स छूट बंद कर दी गई, इससे हर साल लगभग 500 करोड़ रुपए का आंकड़ा छूने वाला मेला 150 से 200 करोड़ रुपए के व्यवसाय पर सिमट गया।

मेले के मुख्य आकर्षण रहे ऑटो मोबाइल सेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर की रौनक खत्म हो गई।

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

डिसक्लेमर :ऊपर व्यक्त विचार इंडिपेंडेंट NEWS कंट्रीब्यूटर के अपने हैं,
अगर आप का इस से कोई भी मतभेद हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखे।