ऋषिकेश एम्स पर आत्मबोधानंद ने लगाया टार्चर कर जान से मारने की साज़िश का आरोप

संक्षेप:

  • संत आत्मबोधानंद ने किया बड़ा खुलासा
  • कहा- AIIMS ऋषिकेश में मुझे मारने की थी साजिश
  • आश्रम में ही ले रहे हैं आयुर्वेदिक उपचार: आत्मबोधानंद

हरिद्वार: पिछले 43 दिनों से गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए संघर्ष कर रहे आत्मबोधानंद ने एम्स ऋषिकेश पर उन्हें टार्चर कर जान से मारने की साजिश का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि अस्पताल में उनका स्वास्थ्य सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ रहा था. वहीं अस्पताल के रवैया पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं.

आत्मबोधानंद ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में जब उनको ड्रिप चढ़ाई गई, उस ड्रिप से उनको सांस लेने में दिक्कत होने लगी. पूरे शरीर में पसीना आने लगा, साथ ही चलने-फिरने में भी दिक्कतें आने लगी.

स्वास्थ्य बिगड़ता देख ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने एम्स प्रशासन से ड्रिप की जगह सामान्य नींबू पानी, शहद और नमक देने की गुहार लगाई. लेकिन उन्होंने जवाब में पानी देने के लिए कोई भी नहीं है कहकर मना कर दिया. उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन उन्हें मारना चाह रहा था.

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अस्पताल की व्यवस्थाओं से परेशान होकर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने वापस अश्रम जाने के लिए कहा. लेकिन एम्स प्रशासन द्वारा इसके लिए मना कर दिया गया. जिसके बाद उन्होंने हरिद्वार मातृ सदन आश्रम में फोन करके अपने स्वास्थ्य की जानकारी दी और वापस आने की इच्छा जताई.

1 दिसंबर को बकायदा ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने एम्स के डॉक्टर को LAMA (लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) भर कर दिया. जिसे डॉक्टरों ने स्वीकार नहीं किया और वहां से वापस हरिद्वार आ गए.

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के एम्स ऋषिकेश से हरिद्वार वापस आने के बाद से ही प्रशासन और मातृ सदन के बीच ठनी हुई है. प्रशासन उनको वापस ले जाने के लिए कई तरीके के प्रयास कर चुका है. लेकिन अबतक प्रशासन के हाथ केवल नाकामी ही लगी है. आत्मबोधानंद का कहना है कि वह आश्रम में ही आयुर्वेदिक उपचार ले रहे हैं. जिससे उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार है.

पिछले 43 दिनों से गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए स्वामी सानंद के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अनशन कर रहे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद  को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आने के बाद प्रशासन द्वारा 29 नवंबर को ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था. जिसके बाद अचानक 1 दिसंबर की शाम यह खबर आई थी कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद प्रशासन की नाक के नीचे से एम्स ऋषिकेश से फरार हो गए हैं और बिना किसी की जानकारी के मातृ सदन हरिद्वार पहुंच चुके हैं.

इसके बाद हरिद्वार स्थित मातृ सदन में जमकर बवाल हुआ था एवं हरिद्वार के एसडीएम मनीष सिंह और मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद के बीच जमकर तीखी नोक झोंक भी हुई थी. प्रशासन द्वारा इस घटना के बाद दोबारा से ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को वापस AIIMS ले जाने की खूब कोशिश की गयी लेकिन इसमें सफल ना हो सकी. 

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