हरिद्वार के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने की बैठक, बोले- गंगा में न फैलाई जाए कोई गंदगी

संक्षेप:

  • सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने गंगा स्वच्छता को लेकर की समीक्षा बैठक
  • बोले- गंगा में न फैलाई जाए कोई गंदगी
  • अधिकारियों से ये बोले रमेश पोखरियाल निशंक

हरिद्वार: हरिद्वार के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने नमामि गंगे योजना के तहत गंगा स्वच्छता को लेकर समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि गंगा में कोई गंदगी न फैलाई जाए। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे का लक्ष्य गंगा को गंगोत्री से लेकर मैदान तक स्वच्छ बनाना है। कोई भी विभाग अपने अनुसार यह तय नहीं कर सकता कि कहां गंगा है और कहां चैनल योजना गंगा को समर्पित है।

सोमवार को हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने नमामि गंगे योजना को लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल संस्थान जल निगम आदि संस्थानों की ओर से किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की।

उन्होंने जिलाधिकारी दीपक रावत और मुख्य नगर आयुक्त नगर निगम नितिन भदौरिया से कहा कि डीएम की अध्यक्षता में बनी जिला स्तरीय गंगा स्वच्छता समिति सुनिश्चित करे कि गंगा और गंगा के आस-पास पॉलिथीन बंद हो। धोबी घाटों के अतिरिक्त गंगा घाटों पर कपड़े धोना, साबुन इत्यादि से स्नान बंद हो। धोबी घाटों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली जाये। कोई भी व्यक्ति गंगा में फूल, पूजा सामग्री इत्यादि प्रवाहित न करे।

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उन्होंने कहा कि इन सब बातों पर अमली-जामा पहनाने के लिए बनायी गई गंगा प्रहरी टीम को और अधिक सशक्त किया जाये। गंगा के किनारे बने कर्मिशियल तथा नॉन कर्मिशियल धार्मिक बिल्डिंग जिला प्रशासन और नगर निगम के सहयोग से अपना सीवरेज सप्लाई और कूड़ा निस्तारण उचित ढंग से करे। गंगा में कोई भी संस्थान अपनी गंदगी न बहाए। कहा कि नगर निगम यह सुनिश्चित करे कि हर छोटी-बड़ी बस्ती और रिहायशी इलाकों तक हर घर में कूड़ेदान पहुंचे और लोग सड़कों, नालियों में गंदगी न डाले।

निशंक ने नमामि गंगे के अन्तर्गत वन विभाग द्वारा गंगा किनारे किये जा रहे वनीकरण की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वनीकरण के लिए गंगा तट के किस स्थान पर वृक्षारोपण होना है, यह कार्य अन्य किसी संस्था के बजाए जिलाधिकारी और डीएफओ के विवेक से होना चाहिए। गंगा किनारे के स्थित जनपदों के जिलाधिकारियों को इसकी जानकारी अधिक होना स्वभाविक है। उन्होंने वन विभाग तथा हरिद्वार-रूड़की प्राधिकरण को नक्षत्र वाटिका और गंगा वाटिका की तर्ज पर शीघ्र ही एक भव्य गंगा म्यूजियम तैयार किये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन मिलकर हरिद्वार के पर्यटकों, तीर्थ यात्रियो के लिए गंगा म्यूजियम के रूप में एक विशेष आकर्षण का केंद्र स्थापित करे।

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