Ramzan 2018: कुछ ऐसा है रमजान का इतिहास, इन चीजों से रहना होता है दूर

संक्षेप:

  • रमजान का महीना होने वाला है शुरू
  • सुबह से शाम तक कुछ नहीं खाते-पीते हैं रोजदार
  • इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है रमजान

इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना यानि रमजान शुरू होने वाला है। इस महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं। रोजे के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते-पीते।

इसके साथ ही रमजान में बुरी आदतों से दूर रहने के लिए भी कहा गया है। रमजान में मुलमान लोग अल्लाह को उनकी नेमत के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। महीने भर रोजे के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर मनाया जाता है। इन सबके बीच क्या आप जानते हैं कि रमजान क्यों मनाया जाता है? और इसका इतिहास क्या है? आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

ऐसा माना जाता है कि मोहम्मद साहब को साल 610 में लेयलत उल-कद्र के मौके पर पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ था। उसी समय से रमजान को इस्लाम धर्म के पवित्र महीने के तौर पर मानाया जाने लगा। इस पवित्र में महीने में मुसलमान लोगों को कुछ खास सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

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रमजान के दौरान रोजे रखने का मतलब केवल यह नहीं होता कि आप भूखे-प्यासे रहें। बल्कि, इस दौरान मन में बुरे विचार ना आने देने के लिए भी कहा गया है। रमजान में मुसलमान को किसी की बदनामी करने, लालच करने, झूठ बोलने और झूठी कसम खाने से बचना चाहिए।

इस साल रमजान महीने का पहला रोजा करीब 15 घंटा 11 मिनट और अंतिम रोजा 15 घंटा 35 मिनट का होगा। पहले रोजे की सहरी सुबह 3:33 बजे और इफ्तरा शाम 6:44 बजे किया जाएगा। आखिरी रोजे में सहरी सुबह 3:22 बजे और इफ्तार शाम 6:57 बजे होगा।

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