गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए अनशन कर रहे संत गोपाल दास अस्पताल से लापता

संक्षेप:

  • संत गोपाल दास लापता
  • गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए कर रहे हैं अनशन
  • दून अस्पताल में उपचार के लिए किया गया था भर्ती

हरिद्वार: गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर लंबे समय से अनशन कर रहे संत गोपाल दास एक बार फिर लापता हो गए हैं. इस बार संत गोपाल दून अस्पताल से लापता हुए हैं. जानकारी के मुताबिक उन्हें देहरादून के सबसे बड़े दून अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था. उपचार शुरू होने के कुछ घंटे के भीतर ही वो अचानक लापता हो गए.

इससे पहले गोपास दास दिल्ली एम्स से दून अस्पताल पहुंचे थे. अस्पताल प्रशासन से सूचना मिलने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची. देर रात तक पुलिस टीम उनकी तलाश करती रही लेकिन, गोपाल दास का अभी तक कोई अता पता नहीं लगा.

लंबे अनशन के चलते स्वास्थ्य बिगड़ने पर संत गोपाल दास पूर्व में ऋषिकेश एम्स में भर्ती थे. वहां से उन्हें सोमवार को दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) रेफर कर दिया गया था. दिल्ली एम्स से डिस्चार्ज होकर गोपाल दास बुधवार सुबह बजे दून अस्पताल पहुंचे थे. यहां उनके शिष्य ने संत को भर्ती कराया था. अस्पताल में उनका उपचार शुरू किया गया लेकिन, उन्होंने देर शाम तक उन्होंने न तो कोई जांच कराई और न ही कोई दवाई ली. अस्पताल में वार्ड 14 के बेड संख्या 15 पर वो भर्ती थे. रात पौने आठ बजे अस्पताल कर्मचारियों ने देखा तो संत और उनके तीमारदार दोनों गायब थे. काफी देर तलाश के बाद प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को दी गई.

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संत के गायब होने की सूचना मिलते ही पुलिस अफसर हरकत में आए. पुलिस टीम सूचना मिलते ही दून अस्पताल पहुंची. वहां आसपास देर रात तलाश करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए लेकिन संत गोपाल दास का कुछ पता नहीं लगा. जब उनके वार्ड में भर्ती मरीजों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शाम के 6 बजे तक वो अस्पताल में मौजूद थे और कुछ पुस्तकें पढ़ने में व्यस्त थे. फिर कुछ देर बाद वो वहीं वार्ड में टहलने लगे और थोड़ी देर बाद गायब हो गए.

इस मामले पर सीओ सिटी चंद्र मोहन का कहना है कि संत गोपाल दास की सुरक्षा में कानूनी तौर पर किसी पुलिसकर्मी की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी. हालांकि, कोतवाली पुलिस को उनपर निगरानी का निर्देश दिया गया था. उनके लापता होने में किसी स्तर लापरवाही हुई, इसकी जांच की जा रही है. उनका पता लगाने का पुलिस प्रयास कर रही है.

गौर हो कि हरिद्वार के मातृ सदन में अनशन के दौरान गोपाल दास ने देह त्यागने के लिए संथारा साधना करने का एलान और अनिश्चितकालीन मौन साधना की घोषणा की थी. गोपाल दास ने बीती 13 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संथारा साधना के दौरान शासन और प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की खलल न डालने की अपील की थी.

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