जानिए चाय बेचने वाला एक शख्स रुड़की में कैसे बचा रहा लोगों की जान

संक्षेप:

  • गंगनहर में बने आधा दर्जन से अधिक घाट साबित हो रहे मौत के घाट
  • एक महीने के भीतर लगभग 47 लोग नहर में डूबे
  • 30 साल का मोनू बचा चुका है सैकड़ों डूबते हुए लोगों की जानें

हरिद्वार: रुड़की के गंगनहर में बने आधा दर्जन से अधिक घाट मौत के घाट साबित हो रहे हैं। पिछले एक महीने के भीतर लगभग 47 लोग नहर में डूब चुके हैं। ऐसे में स्थानीय तैराकों का जलवीर के रूप में सामने आना उम्मीद जगाने वाला है।

30 साल का मोनू पिछले 18 सालों से सैकड़ों डूबते हुए लोगों की जानें बचा चुका है। गंगनहर लगातार लोगों की मौत का कारण बनती जा रही है। नहर के खतरनाक हो चुके घाटों पर हर दिन लोग डूब रहे हैं। बावजूद इसके जल पुलिस की तैनाती को लेकर अधिकारी जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि जून में 16 लोग रुड़की तो 31 लोग कलियर में गंगनहर में डूबकर अपनी जान गंवा चुके हैं।

डूबतों को बचाने के लिये जल पुलिस की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जबतक जलपुलिस मौके पर पहुंचती है, तबतक बहुत देर हो चुकी होती है। ऐसे में स्थानीय गोताखोर डूबतों की जान बचा रहे हैं। इन्ही में से एक है रुड़की का रहने वाला मोनू, जो गंगनहर में डूबने वालों के लिये फरिश्ता बन रहा है। मोनू अबतक सैकड़ों लोगों की जान बचा चुका है।

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30 साल का मोनू जल पुलिस चौकी के ठीक सामने चाय का ठेला लगाकर चाय बेचने का काम करता है। दिन-रात वह इस चाय के ठेले पर ही रहता है। वह पिछले 18 सालों से गंगनहर में डूबने वालो की जान बचा रहा है। मोनू को जब भी किसी के डूबने की सूचना मिलती है तो वह तुरंत उसे बचाने के लिए निकल पड़ता है। मोनू की मानें तो लोगों की जान बचाने पर उसके दिल को सुकून मिलता है। इसके साथ ही कई बार तो थाने की पुलिस भी मोनू की मदद लेती है।

वहीं मोनू के पिता का कहना है कि उनका बेटा 18 सालों से डूबते लोगों की जान बचाता आ रहा है। वह कहते हैं कि उनका लड़का अपनी जान पर खेलकर लोगों को डूबने से बचाता है। पिता का कहना है कि उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उनकी मांग है कि सरकार उनके बेटे मोनू को रोजगार दे, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके।

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