इंदौर के आंखफोड़वा कांड में कमलनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आई हॉस्पिटल ( Eye Hospital) के डायरेक्टर डॉक्टर सुधीर महाशब्दे, डॉक्टर सुहास बांडे, वरिंदर कौर और अनुसुइया चौहान पर छत्रीपुरा थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी है

11 मरीजों की आंखों की रोशनी छिन जाने के मामले में बनाई गई जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही उजागर हुई थी. स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के जिम्मेदार अफसरों ने मिलकर न सिर्फ आठ दिन तक घटना को छिपाकर रखा, बल्कि ओटी (Operation Theatre) सील करने के बाद सैंपल भेजने में भी 6 दिन लगा दिए. इस पूरे मामले में अंधत्व निवारण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. टीएस होरा को सबसे पहले सस्पेंड किया गया. उसके बाद बुधवार को अस्पताल के डायरेक्टर और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज की गई है. छत्रीपुरा थाने में दर्ज हुई है डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मरीजों का हुआ था ऑपरेशन  दरअसल बीते आठ अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मोतियाबिंद के मरीजों को आई हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया था. जहां ऑपरेशन के बाद 11 मरीजों के आंख की रोशनी चली गई थी . इस मामले में अस्पतालों का मानवीय चेहरा भी सामने आ रहा है. इंदौर के चोइथराम अस्पताल और चेन्नई के शंकर नेत्रालय ने मरीज़ों से कोई भी शुल्क नहीं लेने की घोषणा की है.कलेक्टर ने की है टीएस होरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सिफारिश  कलेक्टर ने इस मामले में ज़िला अंधत्व निवारण अफसर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सिफारिश की है. स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. इस मामले में कलेक्टर ने हेल्थ कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट भेज दी है. इस रिपोर्ट में जिला अंधत्व निवारण अधिकारी टीएस होरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की अनुशंसा की गई है क्योंकि 2011 में भी ये ही प्रभारी थे. उस समय भी 18 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी. धार और इंदौर सीएमएचओ की भी लापरवाही सामने आई है. ये भी पढ़ें- छात्रा का यौन शोषण करने वाला कोचिंग संचालक गिरफ्तार सहकारी समिति के मैनेजर के यहां मिली 1.5 करोड़ की संपत्ति।

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