वित्त विभाग द्वारा संचालक तकनीकी शिक्षा (डीटीई) को भेजे गए एक पत्र ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का एजुकेशन हब कहे जाने वाले इंदौर (Indore) शहर की चिंता बढ़ा दी है

सरकार ने प्रदेश के दो सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों का अनुदान बंद कर निजी कॉलेजों में शुमार करने की रणनीति बनाई है. श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science) और श्री वैष्णव पॉलिटेक्निक कॉलेज (Shri Vaishnav Polytechnic College) को शासन से मिलने वाला अनुदान बंद करने की सिफारिश सरकार से की गयी है. विभाग ने ये पत्र अब कॉलेज प्रशासन को भेज भी दिया है. जबकि अनुदान के खत्म होने के आदेश के बाद शिक्षकों में आक्रोश दिखाई देने लगा है. यही वजह है कि एसजीएसआईटीएस परिसर के मुख्य द्वार पर बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. गरीब छात्रों पर पड़ेगी मार शिक्षकों का कहना है कि इससे गरीब बच्चों का प्रवेश कॉलेज में नहीं हो पायेगा और तकनिकी शिक्षा का हनन होगा. प्रदेश में तकनिकी इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में एसजीएसआईटीएस प्रदेश में पहले स्थान पर है.बता दे कि 67 वर्ष पुराने एसजीएसआईटीएस में हर साल बड़ी-बड़ी कंपनियों के प्लेसमेंट होते हैं और देशभर से कई छात्र पढ़ाई करने के लिए कॉलेज में प्रवेश लेते हैं. खास बात यह है कि प्रदेश के कई राजनेता जैसे गृह, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री बाला बच्चन, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एसजीएसआईटीएस से पढ़ाई कर चुके हैं और पुराने छात्रों के सहयोग से कई विकास कार्य कॉलेज में किये हैं. गृह मंत्री पर टिकी निगाहें शुक्रवार को गृह मंत्री बाला बच्चन गवर्निंग बॉडी की बैठक के लिए इंदौर आ रहे है, जहां पर शिक्षक और छात्र मिलकर ज्ञापन देंगे और फैसले को रोकने की अपील करेंगे. गौरतलब है कि प्रदेश में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कई आयाम यहां के छात्रों ने कायम किये है. अगर सरकार से प्राप्त अनुदान यहां पर बंद होता है तो इसका नुकसान आने वाले दिनों में लाखों गरीब छात्रों को उठाना पड़ सकता है. ये भी पढ़ें-गोपाल भार्गव ने दिया CM हाउस के बाहर अनशन का अल्टीमेटम, ये है वजह कमलनाथ सरकार के मेडिकल बॉन्‍ड से छात्रों में आक्रोश, HC ने खारिज की याचिकाएं।

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