ताई के बिना इंदौर में सूना है चुनावी घमासान, बीजेपी के लिए आसान नहीं है इस बार राह

संक्षेप:

  • इंदौर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला बराबरी का है.
  • सुमित्रा महाजन के मैदान में न होने के कारण इस बार बीजेपी को वॉकओवर नहीं मिल रहा.
  • पिछले 30 साल से हालांकि बीजेपी इंदौर में विजय पताका फहरा रही है.

इंदौर: इंदौर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला बराबरी का है. सुमित्रा महाजन के मैदान में न होने के कारण इस बार बीजेपी को वॉकओवर नहीं मिल रहा. कांग्रेस और बीजेपी उम्मीदवार एक कद के हैं इसलिए इस बार मुक़ाबला भी बराबरी का है. पिछले 30 साल से हालांकि बीजेपी की विजय पताका फहरा रही है. लेकिन यहां की पहचान बन चुकी सांसद सुमित्रा महाजन के इस बार चुनावी समर से हटने के कारण हार-जीत के समीकरण एकदम बदल गए हैं. इंदौर में 19 मई को मतदान है. मुख्य मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी शंकर लालवानी और कांग्रेस उम्मीदवार पंकज संघवी के बीच है यहां रोचक संयोग की बात ये है कि सांसद की दौड़ में शामिल दोनों चुनावी प्रतिद्वन्द्वी अब तक इंदौर नगर निगम के पार्षद पद का चुनाव ही जीत सके हैं. दोनों हम उम्र हैं. दोनों 58 साल के हैं और अमूमन लो-प्रोफाइल रहकर राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं.

इंदौर सीट से पिछले 8 बार से बीजेपी की सुमित्रा महाजन जीत रही थीं. इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला. अब प्रत्याशी बदलने के बाद पार्टी अपनी सीट बचाने की जुगत में है. पार्टी ने ताई का टिकट तो काट दिया लेकिन उनकी जगह किसी हैविवेट को टिकट नहीं दिया. कांग्रेस उम्मीदवार भी उन्हीं के कद के हैं. इसलिए इस बार मुकाबला बीजेपी के लिए एकतरफा ना होकर बराबरी का मुकाबला है. बीजेपी जहां नौवीं बार लगातार जीत का रिकार्ड बनाने की तैयारी में है तो वहीं कांग्रेस तीस साल का सूखा खत्म करने की कोशिश कर रही है. सांसद की दौड़ में पहली बार शामिल बीजेपी प्रत्याशी शंकर लालवानी ने पीएम मोदी के नाम पर वोट मांगे.इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के पूर्व चेयरमैन और इंदौर नगर निगम के पूर्व सभापति लालवानी अपनी सभाओं में राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और घुसपैठियों को देश से बाहर खदेड़ने जैसे मुद्दों को लेकर मुखर रहे. गुरुवार को उनके साथ सुमित्रा महाजन भी प्रचार के लिए निकलीं. 56 दुकान इलाके में उन्होंने जनसंपर्क किया. आज प्रचार के आखिरी दिन उनका महाजनसंपर्क हो रहा है जिसमें बीजेपी के सभी स्थानीय बड़े नेता शामिल होंगे.

उधर कांग्रेस उम्मीदवार पंकज संघवी 21 साल के लम्बे अंतराल के बाद अपने सियासी करियर का दूसरा लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें वर्ष 1998 में इंदौर लोकसभा क्षेत्र में ही बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन के हाथों 49,852 मतों से हार का स्वाद चखना पड़ा था. इस बार संघवी ने अपने चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय मुद्दे उठाने के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार, बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा,स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी जैसे वादे किए हैं. उन्होंने चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में अपना पूरा दमखम लगा दिया.

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ताई के चुनाव से हटने के बाद इंदौर सीट का दर्जा भले ही वीवीआईपी से सामान्य रह गया हो लेकिन आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर पर दोनों दलों की नज़र है. क्योंकि प्रदेश की सत्तर फीसदी अर्थव्यवस्था इसी शहर से चलती है. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है इसलिए सीएम कमलनाथ के लिए ये सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है. बीजेपी लगातार नौवीं बार ये सीट जीतकर अपना दबदबा कायम रखने के लिए बेचैन है.

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