क्या मध्य प्रदेश की सरकार बदलते ही लग सकती है केंद्र की योजनाओं पर ब्रेक ?

संक्षेप:

  • अब केंद्र की योजनाओं पर भी लग सकती है ब्रेक
  • बजट के विवाद में कई योजनाएं रूकने के कगार में हैं
  • गरीबों की छत पर भी मंडराने लगे हैं संकट के बादल 

मध्य प्रदेश में  केंद्र की योजनाओं की रफ्तार में  सरकार बदलते ही ब्रेक लगने की आशंका है. बजट के हुए विवाद में कई योजनाएं या तो रुकी हुई हैं या रुकने के कगार पर हैं. 

इन्हीं में से एक प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. योजना में केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी का क्रेडिट और बजट विवाद की वजह बनता दिख रहा है.
सरकार बदलते ही बीजेपी सरकार की योजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे थे. नई सरकार से संकेत भी मिले कि पहले की योजनाएं या तो बंद होंगी या उनके नाम बदले जाएंगे लेकिन अब केंद्र की योजनाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन गई है. आलम ये है कि गरीबों की छत पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं में क्रेडिट की लड़ाई और बजट की ज़रूरत के बीच एमपी में ये योजना लड़खड़ाती दिख रही है.

मध्य प्रदेश में आंकड़ों को देखे तो प्रधानमंत्री आवास योजना में 2018-19 के दौरान 5 लाख 61 हज़ार घर बनाने का लक्ष्य था. इस लक्ष्य के विपरीत मध्य प्रदेश में योजना के तहत 5 लाख 19 हज़ार घर बने हैं. 2019-20 में योजना के तहत 8 लाख 32 हज़ार घर बनाने का लक्ष्य है लेकिन फंड केवल 3 लाख 80 हज़ार घरों के लिए ही बचा है.

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देखना होगा दोनो सरकार मिलकर क्या फैसला करते हैं.  उन्हीं योजनाओं में काम आगे बढ़ेंगे या योजनाएं बदलेंगे.

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