जबलपुर में केंद्रीय गृहमंत्री शाह और मुख्यमंत्री चौहान ने अमरशहीद राजा शंकरशाह व कुंवर रघुनाथशाह के बलिदान दिवस पर प्रतिमा स्थल पहुंच दी श्रद्धांजलि

इसके पूर्व केन्द्रीय गृहमंत्री श्री शाह के प्रतिमा स्थल पहुंचने पर विधायक श्रीमती नंदनी मरावी और राज्यसभा सांसद श्रीमती संपतिया उइके ने परंपरागत आरती कर रोली का टीका लगाया और शॉल पहनाया।

श्री शाह को मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्री कुलस्ते ने स्वाधीनता आंदोलन के नायक राजा शंकरशाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह की मंडला जिला स्थित पवित्र जन्मस्थली और रामनगर मंडला में स्थापित गोंडवाना साम्राज्य के राजस्तंभ का चित्र भेंट किया।इस अवसर पर केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण एवं जलशक्ति राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री श्री रामेश्वर तेली, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद बीडी शर्मा, सांसद राकेश सिंह, प्रदेश के गृह, जेल, संसदीय कार्य, विधि एवं विधायी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, जबलपुर जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के लोक निर्माण, कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री गोपाल भार्गव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  बिसाहूलाल सिंह, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, जनजातीय कार्य विभाग, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह, सहकारिता एवं लोक सेवा प्रबंधन मंत्री  अरविंद भदौरिया, राज्यसभा सांसद श्रीमती संपतिया उइके और विधायक नंदनी मरावी उपस्थित रहे।क्षमा मांगने से किया इंकार अंग्रेजों की अदालत ने राजा शंकरशाह और उनके युवा पुत्र को मृत्युदंड की सजा सुनाने के बाद शर्त रखी की यदि वे क्षमा मांग लें तो उनकी मृत्युदंड की सजा माफ कर दी जायेगी, लेकिन दोनों अमर शहीदों ने अंग्रेजों की गुलामी के स्थान पर देश के लिए बलिदान देने का मार्ग चुना।हमें फांसी नहीं तोप से उड़ाया जाये मौत के डर से बेखौफ पिता-पुत्र ने अंग्रेजी अदालत में कहा- हम ठग, पिंडारी, चोर, लुटेरे, डाकू और हत्यारे नहीं हैं, जो हमें फांसी दी जाये, हम गोंडवाना के राजा हैं।

इसलिए हमें तोप के मुंह से बांधकर मृत्युदंड दिया जाये।तोप के मुंह पर बांधकर दिया मृत्युदंड राजा शंकरशाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह ने आजादी की लड़ाई में देश के लिए उत्कृष्ट त्याग और बलिदान दिया।

वे अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के विरूद्ध अपने विचारों और कविताओं के माध्यम से लोगों में आजादी के लिए जोश व उत्साह भरते थे।

उनकी कविताओं से अंग्रेजों के विरूद्ध विद्रोह की आग सुलग उठी।

डिप्टी कमिश्नर ई. क्लार्क ने गुप्तचर की मदद से पिता-पुत्र को 14 सितम्बर 1857 की शाम 4 बजे बंदी बना लिया।

अगले तीन दिनों तक मुकदमें का नाटक करते हुए वीर सपूत राजा शंकरशाह व कुंवर रघुनाथ शाह को 18 सितम्बर 1857 को प्रात: 11 बजे तोप के मुंह पर बांधकर मृत्युदंड दे दिया।वीरगति से पहले सुनाई कविता गोंडवाना राजा शंकरशाह ने मौत सामने होने के बाद भी वहां मौजूद जनता को आजादी और ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने का जोश पैदा करने वाली कविता सुनाया।

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