CM गहलोत का किसानों को तोहफा, सालाना इतने हजार रुपये मिलेंगे विशेष अनुदान

संक्षेप:

  • गहलोत सरकार ने किसानों का बड़ी राहत देते हुए खेतों की बाड़ या खेतों की तारबंदी के लिए विशेष अनुदान देने की घोषणा की है.
  • कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में जानकारी दी. 
  • किसानों को तारबंदी हेतु पेरीफेरी अधिकतम राशि 40 हजार रुपए,  प्रति किसान 400 रनिंग मीटर तक अनुदान दिया गया है.

जयपुर: राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार ने किसानों का बड़ी राहत देते हुए खेतों की बाड़ या खेतों की तारबंदी के लिए विशेष अनुदान देने की घोषणा की है. कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में जानकारी देते के लिए बताया कि किसानों को तारबंदी हेतु पेरीफेरी (परिधि) लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम राशि 40 हजार रुपए (जो भी कम हो) प्रति किसान 400 रनिंग मीटर तक अनुदान दिया गया है. वर्ष 2019-20 में राज्य के समस्त जिलों में तिलहनी फसलों के क्षेत्रफल को ध्‍यान में रखते हुए राशि 562.200 लाख रुपए का वित्तीय एवं 5 लाख 62 हजार 250 मीटर भौतिक लक्ष्यों का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है.

लिखित जवाब में दी जानकारी

कटारिया ने प्रश्नकाल में विधायक कन्हैया लाल के एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि किसानों द्वारा खेतों की सुरक्षा के लिए तारबंदी हेतु सरकार से अनुदान की मांग की जाती रही है. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-तिलहन के अन्तर्गत नीलगाय और अन्य जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सभी श्रेणी के कृषकों को लक्षित कर सामुदायिक आधार पर कांटेदार/ चैनलिंक तारबंदी कार्यक्रम चालू किया गया है, जिसमें कम से कम 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल हो एवं 3 कृषकों का समूह हो.

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परमिट के लिए प्रक्रिया भी तय

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले रोजड़ों को कृषकों द्वारा आवेदन करने पर राज्य सरकार ने वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 की धारा 11 (1) (बी) के अन्तर्गत मारने हेतु अधिसूचना 03 मार्च 1994 से उप वन संरक्षकों को, 19 जनवरी 1996 व 30 अप्रैल 1997 से क्षेत्रीय वन अधिकारियों रेंजर्स एवं अधिसूचना 31 अगस्त 2000 द्वारा राज्य के समस्त जिलों में पदस्थापित जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, उप खण्ड अधिकारी, पुलिस उप अधीक्षक, सहायक वन संरक्षक, विकास अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं थाना प्रभारी अधिकारी को परमिट देने हेतु प्राधिकृत किया हुआ है.

कृषि मंत्री ने बताया कि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली सुअरों को मारने की अनुमति देने हेतु राज्य सरकार के आदेश 31 मार्च 1998 की पालना में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राजस्थान जयपुर द्वारा उप वन संरक्षकों को जिला कोटा, बून्दी, सवाईमाधोपुर, करौली, पाली, सिरोही, उदयपुर, चित्तौडगढ़, झालावाड़, अलवर, जयपुर, डूंगरपुर, जालौर, बीकानेर, तथा श्रीगंगानगर, में अपने-अपने अधिकर क्षेत्र में वन्यजीव अभयारण्यों/राष्ट्रीय उद्यानों से 15 किलोमीटर की परिधि के बाहर प्राधिकृत किया गया है. साथ ही उप मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक/क्षेत्र निदेशक/उप निदेशक तथा उप वन संरक्षक (वन्यजीव) को अपने-अपने क्षेत्रधिकार वाले जिलों में वन्यजीव अभयारण्य /राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से 15 किलोमीटर तक की परिधि में प्राधिकृत किया गया है.

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