कोटा: 107 बच्चों की मौत, जांच आयोग ने कहा- 'अस्पताल में घूम रहे थे सुअर, टूटे थे दरवाजे'

संक्षेप:

  • 107 बच्चों की मौत के मामले में राजस्थान में कोटा के जेके लोन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सवालों के घेरे में हैं.
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पिछले दिनों हॉस्पिटल की जांच के दौरान पाया कि किसी भी खिड़की के शीशे नहीं थे.
  • इतना ही नहीं, आयोग ने सुअर के बच्चों को अस्पताल परिसर में घूमते पाया. 

कोटा: 107 बच्चों की मौत के मामले में राजस्थान में कोटा के जेके लोन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सवालों के घेरे में हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पिछले दिनों हॉस्पिटल की जांच के दौरान पाया कि किसी भी खिड़की के शीशे नहीं थे। दरवाजे टूटे हुए थे। ऐसे में प्रतिकूल मौसम से भी बच्चे पीड़ित थे। इतना ही नहीं, आयोग ने सुअर के बच्चों को अस्पताल परिसर में घूमते पाया। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए लिखा गया है कि जिले के मुख्यचिकित्साधिकारी 7 जनवरी को सभी दस्तावेजों के उपलब्ध हों।

इस बीच लोकसभा स्पीकर और कोटा से सांसद ओम बिड़ला ने यहां पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। वहीं, मामले की जांच के लिए एक केंद्रीय टीम भी अस्पताल पहुंच गई है। बता दें कि 29 दिसंबर को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण के प्रमुख प्रियंक कानूनगो ने टीम के साथ अस्पताल का दौरा किया था। उन्होंने बताया कि अस्पताल में समान्य रखरखाव की चीजें भी उपलब्ध नहीं हैं। सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब है। आयोग ने पाया कि अस्पताल उपकरणों का कोई रेकॉर्ड नहीं बनाया गया था।

शिक्षा विभाग के सचिव को भी दिया था नोटिस

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शिशुओं की मौत के मामले में इतनी बड़ी लापरवाही को लेकर आयोग की तरफ से राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव वैभव गैलरिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 30 जनवरी को जारी नोटिस में तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया था। कानूनगो ने बताया, `अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।`

कर्मचारियों की संख्या भी बेहद कम

टीम ने अपनी जांच में पाया कि अस्पताल में 15 में से सिर्फ 9 वेंटिलेटर की काम कर रहे थे। इन सभी पहलुओं पर स्पष्टीकरण की मांग करते हुए, आयोग ने उन उपकरणों के बारे में भी जानकारी मांगी है जो काम करने की स्थिति में नहीं थे जब 48 घंटे के भीतर 10 बच्चों की मृत्यु हो गई थी। आयोग ने यह भी पाया कि अस्पताल में कर्मचारियों की भारी कमी है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मानदंडों से यह काफी पीछे है।

बच्चों की मौत पर राजनीति शुरू

उधर, इस मामले को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। बच्चों की मौत के मामले में 9 दिन बाद शुक्रवार को सूबे के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने वसुंधरा राजे का नाम लिए बगैर पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार को अस्पतालों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने जो कमियां की हैं, हम उन्हें दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।

बीजेपी पर बोला हमला

बीजेपी पर हमला बोलते हुए शर्मा ने कहा, `अस्पताल की तरफ से बेहतर सुविधाओं के लिए बार-बार फंड मांगा गया। पर, पूर्व की बीजेपी सरकार ने इसकी अनदेखी की। हम अब अस्पताल की सुविधा बेहतर करने में जुटे हैं।`

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