डेंगू मरीजों की नहीं हो रही जांच, सैंपल देने के लिए भेजा जा रहा मेडिकल कॉलेज

संक्षेप:

  • सैंपल देने के लिए दस किलोमीटर का सफर।
  • बाहर से भी लिखी जा रहीं दवाइयां।
  • जिला अस्पताल का डेंगू वार्ड भी लगभग फुल।

झांसी- जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के इलाज में घोर लापरवाही बरती जा रही है। डेंगू की जांच कराने के लिए मरीजों को मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। दस किलोमीटर का सफर करके मरीज जांच कराने जाएंगे तो उसकी सेहत सुधरने के बजाय और बिगड़ जाएगी। ऐसे में कई रोगियों ने जांच ही नहीं कराई।

सरकारी अस्पतालों की सूरत बदलने के लिए योगी सरकार भरपूर बजट दे रही है। इसके बावजूद अफसरों की उदासीनता के कारण अस्पताल की छवि खराब हो ही रही है।

डेंगू के मरीजों की भी सरकारी अस्पतालों में भरमार है। जिला अस्पताल का डेंगू वार्ड भी लगभग फुल है। मगर लापरवाही चरम पर है। मगर भर्ती मरीजों की डेंगू जांच का सैंपल अस्पताल की तरफ से नहीं भेजा जा रहा है। बल्कि मरीज को ही मेडिकल कॉलेज सैंपल देने जाना पड़ रहा है। बुखार, उल्टी और कमजोरी से परेशान मरीजों को ऊपरी मंजिल से उतरकर लगभग दस किलोमीटर का सफर करके मेडिकल कॉलेज पहुंचना होता है। ऐसे में मरीजों की सेहत सुधरने के बजाय बिगड़ने लगती है। इस डर से कई मरीजों ने तो जांच तक नहीं कराई है।

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डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों से बाहर से भी दवाएं मंगवाई जा रही है। मरीजों से जब बातचीत की गई तो उन्होंने अपना दर्द बयां किया। सिरप से लेकर टैबलेट तक मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर हैं। न ही कोई सुनवाई करने वाला है और न ही कोई मरीजों की समस्या हल करने वाला।

रात में नहीं मिलते स्वास्थ्यकर्मी
सिविल लाइन की नेहा वॉल्टर नौ सितंबर से जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती हैं। उनके पति सनी वॉल्टर ने बताया कि रविवार रात को वार्ड में कोई स्टाफ भी नहीं था। बगल वाले वायरल वार्ड में गए तो भी कोई कर्मचारी नहीं मिला। डेंगू की जांच के लिए मरीज को मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए बोल रहे हैं। सनी ने बताया कि उनकी पत्नी की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। कुछ भी खाना-पीना बंद कर दिया है। थोड़ा खाती है तो उल्टी हो जाती है। जब कहा कि सैंपल लेकर दे दो तो स्टाफ ने साफ मना कर दिया।

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