झांसी में लड़का बनकर लड़की करना चाहती है अपनी सहेली से शादी

संक्षेप:

  • झांसी में समलैंगिकता के कई ऐसे मामले सामने आए हैं
  • युवक अपने दोस्त के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने लगा
  • परिजनों ने अपने बच्चों का इलाज मनोचिकित्सक से करवाया

झांसी। जब से समलैंगिकता पर कानून बनाकर सेम जेंडर से शादी करना कानूनी बन गया है तब से देश में इसके बहुत से मामले देखने को मिल रहे हैं. झांसी में समलैंगिकता के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें कोई लड़की लड़का बनकर सहेली से शादी करना चाहती है तो कोई युवक अपने दोस्त के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने लगा है।

जिस किसी परिजन को भी अपने बेटे या बेटी के समलैंगिक होने का पता चलता है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। कई परिजनों ने अपने बच्चों का इलाज मनोचिकित्सक के पास शुरू भी कराया है। पिछले दिनों ललितपुर में रिश्ते की बहनों ने भी एक दूसरे से शादी करने की इच्छा जताई थी। मामला पुलिस तक पहुंचा था।

जिला अस्पताल में तैनात मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि समलैंगिक होने के मामले पता चलने पर परिजन बच्चों के साथ नाराजगी, दबाव बनाना या फिर कभी-कभार मारपीट भी करने लगते हैं, जो कि बिल्कुल ठीक नहीं है। उन्हें बच्चों की मनोदशा को समझकर अच्छा व्यवहार करना चाहिए। धीरे-धीरे बच्चों को समझाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि बच्चों पर दबाव बनाएंगे तो वह एंजाइटी या फिर डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। कई तो नशे के आदी हो जाते हैं।

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वहीं, डिप्रेशन में आकर युवक-युवती ने आत्महत्या करने तक का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि अब समलैंगिकता के मामले बढ़ने लगे हैं। पिछले डेढ़-दो साल में 10 मामले सामने आ चुके हैं। पारिवारिक माहौल शांत रहे, इसके लिए वह फैमिली थेरेपी देती हैं। परिजनों को समझाती हैं कि बेटा या बेटी के साथ मारपीट न करें, बंदिशें न लगाएं। यह कोई बीमारी नहीं है। इसलिए इसकी कोई दवा नहीं है। काउंसिलिंग और इलाज करके व्यवहार या सोच में कुछ सुधार किया जा सकता है। संवाद ही सामान्य जीवन का एकमात्र उपाय है।

शुरूआत में ही बच्चों पर दें ध्यान

- मां-बाप बच्चों को लेकर शुरू से जागरूक रहें कि कहीं बच्चा समान जेंडर के प्रति आकर्षित तो नहीं हो रहा।

- बच्चा ऐसा व्यवहार तो नहीं करने लगा है कि वो उसके जेंडर के विपरीत हो।

- यदि ऐसा होता है तो काउंसिलिंग के लिए मनोचिकित्सक से संपर्क करें।

- आधुनिकता की दौड़ में भारतीय परिवेश और संस्कृति से बच्चों को जोड़े रखें।

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