आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

संक्षेप:

  • आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी है.
  • गुजरात के सूरत रेप केस में आसाराम ने जमानत की मांग की थी.

नई दिल्ली: आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी है. गुजरात के सूरत रेप केस में आसाराम ने जमानत की मांग की थी. मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि आसाराम के खिलाफ सूरत में चल रहे रेप केस में अभी 10 गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी है. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना मामले का निपटारा करे.

रेप के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं आसाराम

मालूम हो कि ताउम्र जेल की सजा काट रहे आसाराम की सजा पर रोक लगाने की याचिका 26 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी. इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने आसाराम की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी थी. गौरतलब है कि आसाराम पर बलात्कार और हत्या का मामला है और इसी मामले में वह जेल में बंद है. बात दें कि राजस्थान के जोधपुर स्थित अपने आश्रम में वर्ष 2013 में 16 साल की एक लड़की के साथ दुष्कर्म करने के मामले में जोधपुर की अदालत ने आसाराम को को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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आसाराम के पास 400 से ज्यादा आश्रम और 10,000 करोड़ का साम्राज्य

दरअसल, साबरमती नदी के किनारे एक झोंपड़ी से शुरुआत करने से लेकर देश और दुनियाभर में 400 से अधिक आश्रम बनाने वाले आसाराम ने चार दशक में 10,000 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया था. आसाराम और चार अन्य सहआरोपियों के खिलाफ पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत छह नवंबर 2013 को पुलिस ने आरोपपत्र दायर किया था. पीड़िता ने आसाराम पर उसे जोधपुर के नजदीक मनाई इलाके में आश्रम में बुलाने और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था.

जोधपुर जेल में सजा काट रहा है आसाराम

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली पीड़िता मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी. फैसले के बाद पीड़िता के पिता ने कहा,‘हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और हमें खुशी है कि न्याय मिला.` उन्होंने कहा कि परिवार लगातार दहशत में जी रहा था और इसका उनके व्यापार पर भी काफी असर पड़ा. फैसले के मद्देनजर जोधपुर जेल के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी जहां पहले से निषेधाज्ञा लागू थी.

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