लेदर इंडस्ट्री के कारोबारियों ने कानपुर छोड़ने की कर ली तैयारी

  • Aditi
  • Monday | 5th June, 2017
संक्षेप:

  • सरकार के नए रूल्स से खरीदार भी परेशान
  • बीते 6-7 महीने में बिजनेस 40 पर्सेंट हुआ ठप
  • पूरी इंडस्ट्री बर्बादी के कगार पर पहुंची

कानपुर- लेदर और लेदर प्रोडक्ट से यूरोपीय और अमेरिकी देशों में धूम मचाने वाली शहर की लेदर इंडस्ट्री को निर्यात के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। एक दशक के बाद इंडस्ट्री की निगेटिव ग्रोथ (निर्यात गिरा) दर्ज की गई है। पहले नोटबंदी की मार, फिर स्लॉटर हाउसों की बंदी और अब मवेशियों के लिए केंद्र सरकार के नए नियम। एक के बाद एक झटकों से कानपुर की लेदर इंडस्ट्री परेशान है। व्यापारियों की मानें तो पिछले 7 महीने में करीब 40 पर्सेंट मजदूर घर लौट गए हैं। 50 पर्सेंट तक बिजनेस घट गया और अब इन नियमों से तो पूरी इंडस्ट्री बर्बादी के कगार पर आ गई है। एक्सपोर्टर असद ईराकी के अनुसार सरकार के नए रूल्स से देश के साथ विदेशी खरीदार भी परेशान हैं। वहीं, रॉ हाइड की कमी और टेनरियों की शिफ्टिंग के प्रपोजल से कानपुर के लेदरवालों पर कोई भरोसा नहीं कर रहा है।

 मिली जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले इटली से खरीदार का फोन आया था। भारत सरकार के नए रूल्स से वह परेशान हो गया। उसे आधे घंटे तक समझाना पड़ा कि फिलहाल थोड़ा प्रॉडक्शन जारी है और उसका ऑर्डर पूरा होगा। एक्सपोर्टर नहीं कर रहे भरोसा ईराकी के अनुसार, कानपुर से अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया को बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट होता है। लेकिन इन सब नए नियमों के बाद कई एक्सपोर्ट फर्म तो समय पर डिलिवरी ही नहीं कर पाईं। बार-बार के झंझटों से विदेशी आयातक उखड़ गए हैं।

सूत्रों का कहना है कि उत्तराखंड में रेड टेप का प्रॉडक्शन लगभग ठप है। कानपुर में भी यही हाल हैं। यही नहीं, दवाओं में इस्तेमाल होने वाले जिलेटिन आदि की सप्लाई मीट इंडस्ट्री से होती थी, लेकिन फिलहाल यहां भी हाहाकार है। उत्तर प्रदेश में चमड़े के गिरते कारोबार को लेकर सरकार को उद्योग संगठन आगाह कर चुके हैं। दक्षिण भारत की लेदर इकाइयां ज्यादा फायदे में दिख रही हैं। लेदर इंडस्ट्री की खस्ता हालत का फायदा कलकत्ता, चेन्नई, मुंबई जैसे दूसरे केंद्र को मिल रहा है। एसोचैम के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, लेदर और उससे जुड़े सामानों के निर्यात के मामले में 29 फीसदी शेयर के साथ उत्तर प्रदेश तमिलनाडु से पिछड़ कर दूसरे स्थान पर आ गया है। वहीं यूपी की निर्यात वृद्धि भी 18 फीसदी से घटकर 12 फीसदी पर पहुंच चुकी है, जबकि पश्चिम बंगाल की 23 फीसदी के साथ निर्यात वृद्धि में अव्वल रहा।

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