हमीरपुर में दो लड़कियों ने किया समलैंगिक विवाह, जानिए दोनों के 7 वचन

संक्षेप:

  • यूपी के हमीरपुर में दो लड़कियों ने किया समलैंगिक विवाह
  • रजिस्ट्रार ऑफिस को प्रार्थना पत्र देकर जुदा न करने की लगाई गुहार
  • शपथ पत्र में किया सात वचनों का जिक्र

कानपुर: देश मे समलैंगिक सम्बन्धो में छूट मिलते ही समलैंगिक विवाहों की बाढ़ आ गयी है। आज फिर यूपी के हमीरपुर जिले में दो लड़कियों ने घर परिवार और समाज का भय छोड़ते हुए आपस मे समलैंगिक विवाह कर लिया।

समाज की सारे रीति रिवाजों और घर परिवार के लोगों को छोड़ कर आज इन लड़कियों ने समलैंगिक विवाह कर एक दूसरे का दामन हमेशा-हमेशा के लिए थाम लिया है। साथ जीने मरने की कसमें खाकर इस समलैंगिक जोड़े ने रजिस्ट्रार ऑफिस को प्रार्थना पत्र देकर पुलिस द्वारा उन्हें जुदा ना करने गुहार भी लगाई है। इस समलैंगिक जोड़ों को देखने के लिए आज कोर्ट परिसर में लोगों का तांता लगा रहा।

मामला हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली दो युवतियां दीप शिखा और अभिलाषा की है। दोनों आज जिला मुख्यालय के रजिस्ट्रार कोर्ट समलैंगिक विवाह के लिए पहुंची। रजिस्ट्रार ने समलैंगिक शादी से जुड़ा कोई भी जिओ विभाग में ना पहुंचने का हवाला देकर दोनों की शादी से इंकार कर दिया लेकिन शादी की जिद में लड़ी दोनों लड़कियों ने एक दूसरे को जयमाला पहनाकर शादी कर ली।

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इस समलैंगिक जोड़े की माने तो वो पिछले 7 सालों से साथ रह रही है जबकि यहां के अधिवताओं और जानकारों की माने तो सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादी को मान्यता दे दी है।

समलैंगिक विवाह में दोनों ने सात वचनों के बजाए 11 बिंदुओं का शपथ पत्र रजिस्ट्रार के सामने प्रस्तुत किया। इसमें सात वचनों का भी जिक्र है।

1- दोनों मिलजुलकर निजी या सरकारी संस्थान में नौकरी करेंगे और एक दूसरे को कोई एतराज नहीं होगा।

2- किसी भी व्यक्ति से शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगे। बच्चे पैदा करने की इच्छा नहीं रखेंगे और इस संबंध में चिकित्सीय सलाह नहीं लेंगे।

3- दोनों आपसी सहमति से नाबालिग बच्चा या बच्ची गोद ले सकेंगे।

4- अदालत में कोई चाराजोई (एक-दूसरे के खिलाफ फरियाद) नहीं करेंगे।

5- बैंक में संयुक्त खाता खोलेंगे, कोई अलग खाता नहीं खोलेगा।

6- दीपशिखा का अपने माता-पिता, भाई-बहन व पूर्व पति की चल-अचल संपत्ति कोई हक नहीं होगा, न ही जताएगी।

7- अभिलाषा अपने पिता के नाम दर्ज मकान में रहेगी और पिता की मौत के बाद उस पर मालिकाना हक रखेगी। वह माता, पिता, भाई, बहन को मकान से बेदखल नहीं करेगी।

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