कानपुर में कोरोना संक्रमित गर्भवतियों के लिए अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा बच्चा अस्पताल में डेडीकेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है। तीन-चार दिन में इसका काम पूरा करने की कोशिश है। इस कॉरिडोर में अलग वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम होगा।

इसके बाद कटनी से सभी युवक मध्यप्रदेश के रास्ते जिले में प्रवेश हुए। मजदूरों ने बताया कि काम बंद होने से वह सब बेरोजगार हो गए थे और उनके पास रुपये भी नहीं बचे थे।

कोई साधन न चलने से वह सब गांव पहुंचने के लिए परेशान थे।

किसी तरह साइकिल से 21 अप्रैल को मुंबई से चले थे। रास्ते में कई जगह लोगों ने उन्हें रास्ता बताया और भोजन भी दिया।

दसवें दिन चित्रकूट पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने उन सभी को जिला अस्पताल भेजा।

जहां स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।उसे सदर अस्पताल ले जाया गया जहां निमोनिया होने की बात कहकर चिकित्सकों ने उसे कानपुर रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

बब्बू ने बताया कि इस घटना से बहू आरती सदमे में आ गई।

वह सभी लोग उसे समझाते रहे लेकिन वह गुमसुम रहने लगी। गुरुवार सुबह वह पुत्र छोटे को लेकर बेतवा नदी किनारे सब्जी की बारी में चला गया।

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