बोफोर्स तोप से ज्यादा शक्तिशाली और मारक है कानपुर में बनी 'धनुष', ये हैं इसकी खूबियां

संक्षेप:

  • देश की सेना  की  ताकत बढ़े, इसके लिए कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री ने बोफोर्स तोप से ज्यादा दूर तक मार करने वाली धनुष तोप तैयार की है.
  • ये पूरी तरह से मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत बनी है और पूरी तरह से स्वदेशी है.
  • धनुष तोप की मारक क्षमता 38 किलोमीटर की है.

कानपुर: देश की सेना को और ताकत मिले, हमारे सैनिकों के पास ताकत बढ़े, इसके लिए कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री ने बोफोर्स तोप से ज्यादा दूर तक मार करने वाली धनुष तोप तैयार की है. इस तोप की सबसे खास बात ये है कि ये पूरी तरह से मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत बनी है. और पूरी तरह से स्वदेशी है.

धनुष तोप की मारक क्षमता 38 किलोमीटर की है

कारगिल में अपना लोहा मनवाने वाली बोफोर्स तोप, जिसकी मारक क्षमता 28 किलोमीटर थी, अब इससे ज्यादा 38 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मनों पर गोला फेंकने का काम धनुष करेगी. धनुष का बैरल कानपुर फील्ड गन फैक्ट्री में तैयार हुआ है और अब ये बैरल जबलपुर जाएगी और कैरेज में फिट करने के बाद धनुष तोप सेना को इशू की जाएगी.

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धनुष का बैरल 8 मीटर का है

फील्ड गन फैक्ट्री के जीएम अनिल कुमार ने बताया कि धनुष का बैरल 8 मीटर का है. जिस कारण इसकी मारक क्षमता 38 किलोमीटर की है. वहीं इससे पहले बोफोर्स का बैरल 7 मीटर का था, जिसकी मारक क्षमता 28 किलोमीटर की थी. वहीं धनुष की कंसिस्टेंसी और एक्यूरेसी बोफोर्स से ज्यादा है और ये तोप हर मौसम और हर परिस्थितियों में अच्छा काम करेगी. इस गन का परीक्षण 2018 में हुआ था और 2019 में इसको बनाने की मंजूरी मिली थी.

यह पहला अपग्रेड वर्जन है

सेना में इसके परीक्षण और सुझावों के बाद यह पहला अपग्रेड वर्जन है, जो काफी खूबियों से लैस है. धनुष का वजन 155 एमएम 39 कैलिबर गन से 700 किलोग्राम ज्यादा है. बैरल भी बोफोर्स गन की तुलना में 877 मिमी ज्यादा है. 1987 में 414 बोफोर्स स्वीडन से आयात की गईं थीं. अभी भी लगभग 300 बोफोर्स तोपें सीमा पर तैनात हैं. बोफोर्स गन की तुलना में धनुष में फायर कम्प्यूटर सिस्टम पर आटो लेईंग प्रणाली है. आधुनिक साइटिंग सिस्टम के तहत नाईट कैमरे की तुलना में डे कैमरा ज्यादा प्रभावी है. बैलिस्टिक गणना, गन रिकॉर्डिंग, गन की पोजिशनिंग, बैक अप साइट सिस्टम अत्याधुनिक है.

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