कानपुर के इस ज्योतिषाचार्य ने बनाया गोबर युक्त गणेश प्रतिमा

संक्षेप:

  • गणेश चतुर्थी पर होता है गणेश पूजन का विशेष महत्व
  • केमिकल युक्त गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने से प्रदूषित होता है पर्यावरण
  • गोबर युक्त गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं कानपुर के विवेक

By: चंद्रकांत तिवारी

कानपुर: भगवान गणेश को यू तो सभी पूजन में सबसे पहले पूजा जाता है लेकिन गणेश चतुर्थी पर गणेश पूजन का विशेष महत्व होता है। पूरे देश में कई जगहों पर भगवान गणेश के बड़े-बड़े पंडाल सजाकर उनमें गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। हम जिस गणेश प्रतिमा को श्रद्धा भाव से पूजते हैं उसको बनाने में प्लास्टर ऑफ पेरिस और केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। केमिकल युक्त गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने से पर्यावरण प्रदूषित होता है।

गणेश विसर्जन में पर्यावरण प्रदूषित ना हो इसके लिए कानपुर के एक ज्योतिषाचार्य गोबर युक्त गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं। गोविन्द नगर में रहने वाले ज्योतिषाचार्य विवेक तिवारी गणेश चतुर्थी के लिए गोबर युक्त गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं। गणेश प्रतिमा में गाय का गोबर, गौमूत्र, गंगा की बालू और उसका जल मिलाकर प्रतिमा बनाई जा रही है।

ये भी पढ़े : सोनभद्र नरसंहार: प्रियंका अड़ीं, बोलीं- 'पीड़ितों से मिले बिना नहीं जाऊंगी'


गणेश प्रतिमा की सुंदरता बढ़ाने के लिए उसको खाने वाले रंगों से रंगा जाता है। विवेक का मानना है कि इनके द्वारा बनाई जा रही गणेश प्रतिमा पूरी तरह से इको फ्रेंडली है, इसका विसर्जन करने से पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। विवेक का कहना है कि ज्यादा लालच के चक्कर में कुछ मूर्तिकार प्लास्टर ऑफ पेरिस प्लास्टिक और केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल करते हैं जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

गणेश चतुर्थी के बाद गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है लेकिन विवेक का मानना है कि हम इतने दिन गणेश का पूजन करते हैं, जिससे उनसे काफी लगाव हो जाता है और विसर्जन के दौरान लोग रोने भी लगते हैं। ऐसे में गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर में ही करें और उससे बनने वाली खाद से अपने घर में पुष्प वृक्ष लगाए जिससे गणेश जी आपके घर में वास करेंगे और सुबह आप उनके दर्शन कर सकते हैं।

विवेक का कहना है की शास्त्रों में बताया गया है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है इसलिए गोबर से निर्मित गणेश का पूजन करने से घर में धन-धान्य का वास रहेगा | पर्यावरण बचाने की अलख जगा रहे ज्योतिषाचार्य का कहना है कि हमारा उद्देश्य है कि नयी पीढ़ी को हम ऐसा वातावरण बना कर दें जैसा हमें हमारे पूर्वजों से मिला था।

इको फ्रेंडली गणेश बनाने में ज्योतिषाचार्य की पत्नी निशि भी उनका काफी सहयोग करती है। गणेश प्रतिमा को किस कलर से रंगा जाय उसका चुनाव कर गणेश की सुन्दर प्रतिमा बनाई जाती है जोकि देखने में काफी मनमोहक लगती है। निशि का कहना है की हमारे देश में गाय को माता माना जाता है इसलिए उनके गोबर से शुद्ध कुछ हो नहीं सकता। जब हम कोई धार्मिक आयोजन करते हैं तो गाय के गोबर से जमीन को लीपते है इसलिए गणेश चतुर्थी पर गणेश का और दीपावली के पर्व गणेश लक्ष्मी बनाते हैं जोकि पूरी तरफ से पर्यावरण के अनुकूल है।

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Kanpur News In Hindi here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए
NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें |

Related Articles