IIT Kanpur थीसिस चोरी केस में निष्कासित हो सकते हैं प्रो डॉ सुब्रमण्यम सडरेला

आईआईटी कानपुर के चार प्रोफेसरों पर दलित उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुब्रमण्यम सडरेला को आईआईटी से निष्कासित किया जा सकता है. दरअसल उनकी पीएचडी की डिग्री को निरस्त करने के लिए सीनेट ने बीओजी को प्रस्ताव भेजा है. डॉ सडरेला पर पीएचडी के दौरान थीसिस चोरी करने का आरोप लगा था, जांच में यह आरोप सही पाया गया है. ऐसे में उनकी पीएचडी की डिग्री वापस ली जा सकती है. बता दें कि 15 अक्टूबर 2018 को एक अज्ञात छात्र ने ईमेल भेज कर सुब्रमण्यम सडरेला पर थीसिस चोरी करने का आरोप लगाया था. डॉ सडरेला ने एक जनवरी 2018 को आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन किया था. 12 जनवरी को उन्होंने संस्थान के चार प्रोफेसरों पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. जिसकी जांच के लिए डायरेक्टर आईआईटी ने एक कमेटी का गठन किया. इस कमेटी ने आरोपों को सही पाया और अपनी रिपोर्ट डायरेक्टर को सौंप दी. जिसके बाद बीओजी ने मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से करायी. जिन्होंने सितम्बर में अपनी रिपोर्ट बीओजी को सौंप दी. बीओजी ने आरोपित प्रोफेसरों को सेवा नियमावली के उल्लंघन का दोषी पाया. हालांकि जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट डॉ सडरेला ने कल्याणपुर थाने में दलित उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज करा दी. जिस पर बाद में हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया. इसके बाद एक अज्ञात छात्र ने सडरेला पर अपनी पीएचडी के दौरान थीसिस चोरी करने का आरोप लगाया. आईआईटी डायरेक्टर ने जांच के लिए कमेटी का गठन किया. जिसमें थिसिस चोरी का आरोप सही पाया गया है. जिसके बाद आईआईटी सीनेट ने उनकी पीएचडी की डिग्री वापस लेने के लिए बीओजी से सिफारिश की है. डिप्टी डायरेक्टर डॉ मणीन्द्र अग्रवाल ने बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेल कर थीसिस चुराने का आरोप लगाया था. जांच में आरोप सही पाए गए. जिसके बाद डायरेक्टर कानपुर ने एथिक्स सेल को संज्ञान लेने को कहा. एथिक्स सेल ने जांच में पाया कि कुछ भाग थीसिस के एक पुरानी थीसिस से मिलते जुलते हैं. लेकिन ये भाग लिटरेचर सर्वे, इंट्रोडक्शन और एपेंडिक्स से मिलते जुलते हैं. उनके सारे रिजल्ट अपने हैं और कोई कॉपी नहीं है. जब संस्थान के सीनेट में यह विषय आया तो एथिक्स सेल और अन्य से चर्चा के बात यह संस्तुति की कि सडरेला जी कि थीसिस रीवाइज की जाए और उनकी पीएचडी डिग्री भी वापस ले ली जाए. यह संस्तुति 9 अप्रैल को बोर्ड ऑफ़ गवर्नर (बीओजी) के सामने रखी जाएगी, जहां यह फैसला होगा कि उनकी पीएचडी वापस लेनी है या नहीं.एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स।

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