SC/ST शिक्षक सुब्रह्मण्यम सदरेला की पीएचडी कैंसल करेगा IIT Kanpur, थीसिस चोरी का है आरोप

संक्षेप:

  • आईआईटी कानपुर सीनेट ने शिक्षक सुब्रह्मण्यम सदरेला के पीएचडी शोध प्रबंध को रद्द करने की सिफारिश की है
  • ये वहीं शिक्षक है जिसने पिछले साल साहित्यिक चोरी के आरोपों पर अपने चार सहयोगियों के खिलाफ उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप लगाया था
  • सुब्रह्मण्यम सदरेला के खिलाफ साहित्यिक चोरी के आरोप एक गुमनाम ईमेल के जरिए फेकल्टी के अन्य सदस्यों को ईमेल भेजकर लगाए गए हैं.

कानपुर: आईआईटी कानपुर(IIT Kanpur) सीनेट ने दलित शिक्षक सुब्रह्मण्यम सदरेला (Subrahmanyam Saderla) के पीएचडी शोध प्रबंध को रद्द करने की सिफारिश की है. आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के ये वहीं शिक्षक है जिसने पिछले साल साहित्यिक चोरी के आरोपों पर अपने चार सहयोगियों के खिलाफ उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप लगाया था. हालांकि संस्थान के अकादमिक नैतिकता सेल को जांच के दौरान थीसिस को निरस्त करने का कोई कारण नही मिला.

सुब्रह्मण्यम सदरेला के खिलाफ साहित्यिक चोरी के आरोप एक गुमनाम ईमेल के जरिए फेकल्टी के अन्य सदस्यों को ईमेल भेजकर लगाए गए हैं. हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज ने मामले की 2 महीने जांच- पड़ताल के बाद चार शिक्षकों को आईआईटी कानपुर के आचरण नियमों का उल्लंघन करने और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम का उल्लंघन करने का दोषी पाया. सीनेट की सिफारिश को संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) के समक्ष जल्द ही रखे जाने की उम्मीद है. सीनेट आईआईटी कानपुर का शैक्षणिक मामलों पर सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है. इसमें सभी फैक्लटी के सदस्य शामिल हैं. इसकी अध्यक्षता संस्थान निदेशक करते हैं. यदि बीओजी ने सीनेट का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, तो सदरेला की पीएचडी वापस ले ली जाएगी. जिसके कारण उन्हें आईआईटी कानपुर की नौकरी गंवानी पड़ सकती है. सदरेला ने हैदराबाद के जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग संस्थान से बीटेक किया और आईआईटी-कानपुर से एमटेक और पीएचडी की है.

1 जनवरी, 2018 को आईआईटी-कानपुर में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में शामिल होने वाले सदरेला ने 12 जनवरी, 2018 को अपने चार सहयोगियों पर भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. आरोपों की जांच करने के लिए आईआईटी के निदेशक ने एक तीन सदस्यों की कमेटी गठित की. 8 मार्च, 2018 को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें उन्होंने उत्पीड़न के आरोप में चारों आरोपियों को दोषी पाया.  6 सितंबर को बीओजी की बैठक में निष्कर्षों पर चर्चा की गई. जिसमें बोर्ड ने फैसला किया कि आरोपी शिक्षकों ने आचरण नियमों का उल्लंघन किया है, लेकिन एससी/एसटी अधिनियम का उल्लंघन नहीं किया. सदरेला ने शिक्षकों के खिलाफ 18 नवंबर को एफआइआर दर्ज करवाई, जिसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रोक दिया था.

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गौरतलब है कि सदरेला के खिलाफ साहित्यिक चोरी के आरोप लगे थे, जिसे आईआईटी कानपुर के प्रबंधक अभय करंदीकर ने अकादमिक एथिक्स सेल के पास भेजा था, जिसमें आरोप सही पाया गया था. हालांकि नवंबर में नौ सदस्यों की टीम ने आरोप को गलत बताया था.

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