कानपुर: बांदा जेल में मुख्तार की एंट्री से क़ैदी हुए खुश, जेल में त्योहार जैसा माहौल, प्रशासन की नींदें उड़ीं

संक्षेप:

  • मुख्तार की बांदा जेल में वापसी
  • मुख्तार की बांदा वापसी से जेल में क़ैदी हुए खुश
  • बंदियों के दिल में मुख्तार के प्रति हमदर्दी फिर जागी

कानपुर । बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पंजाब जेल से यूपी जेल में शिफ्टिंग का जितना तनाव पुलिस व प्रशासन को रहा है. उससे उलटा माहौल इस वक्त बांदा जेल के कैदियों ने बनाया हुआ है. आपको बता दें कि बांदा के कैदी मुख्तार अंसारी की बांदा जेल वापसी से बेहद खुश हैं. सूत्रों के मुताबिक, जेल के अधिकांश बंदी व कर्मचारी बाहुबली की वापसी से खुश हैं।

इसकी वजह यह बताई गई कि पिछली बार करीब 34 महीने यहां रहे मुख्तार ने बंदियों और जेल कर्मियों से किसी तरह की बदसलूकी नहीं की। बताते हैं कि त्योहारों आदि के मौके पर मुख्तार बंदियों आदि पर खास मेहरबान होता था। जेल की कैंटीन आदि से सामान खरीदकर अपने पैसे से पूड़ी-सब्जी और खीर आदि बनवाता था। जरूरतमंद बंदियों को आर्थिक मदद भी मिलती थी। इन सभी कामों ने बंदियों के दिल में मुख्तार के प्रति हमदर्दी पैदा कर दी।

बैरक नंबर 15 में रहे हैं कई बाहुबली

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बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से पहले भी इस बैरक में कई बाहुबली और माननीय मेहमान बन चुके हैं। इनमें कुंडा निवासी पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभइया, प्रयागराज का पूर्व सांसद अतीक अहमद, शामली के विधायक सुरेश राणा, ग्रेटर नोएडा का अनिल दुजाना और हरियाणा का सिंहराज भाटी आदि शामिल हैं। जेल के प्रभारी अधीक्षक प्रमोद तिवारी का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से यह बैरक ठीक है।

जेल में 558 कैदियों की जगह लेकिन रहते हैं 780 बंदी

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1860 में बनी बांदा जेल की क्षमता 558 बंदियों की है, लेकिन यह लगभग हमेशा ओवरलोड रहती है। मौजूदा समय में भी यहां 780 बंदी हैं। इन्हें जेल की कुल 15 बैरकों में रखा जाता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है।

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