कानपुर: कानपुर व देश की शान बनीं ये बेटियां, चूड़ियों की जगह हाथों में रहता है बम

संक्षेप:

  • बम डिफ्यूज़ करती हैं ये लड़कियां
  • परिवार की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं बेटियां
  • शादी को पीछे रख देश की सेवा में लगी हैं महिलाएं

कानपुर । समय बदल रहा है अब महिलाएं सिर्फ शादी ब्याह का नहीं देश के लिए सेवा का भी सोचती हैं. जहां कुछ महिलाएं ऑफिस का काम व घऱ का काम संभाल रही हौं वहीं कुछ महिलाएं देश के लिए अपनी जान पर खेलने को तैयार हैं. मतलब देश की बेटियां हर क्षेत्र में पुरूषों के बराबर खड़ी हैं.

आपको बता दें कि कानपुर में ऐसी ही कुछ बेटियां सामने आईं जिनके हाथों में चूड़ियों की जगह बम डिफ्यूज करने वाले यंत्र हैं, घूंघट की जगह सेना की टोपी पहने ये महिलाएं मातृभूमि की रक्षा में जोश के साथ जुटी हैं। सेना की कठिन ट्रेनिंग करके कोई मेजर बनीं तो कोई लेफ्टिनेंट।

इन्में से एक हैं स्वरूप नगर की रहने वाली अदिति मिश्रा सेना में मेजर हैं। वर्तमान में वह दिल्ली में सेना की इंजीनियर्स शाखा में तैनात हैं। यह शाखा युद्ध के दौरान बारूदी सुरंग (माइंस) बिछाने और डिफ्यूज करने, सैनिकों के लिए अस्थायी ब्रिज बनाने का भी काम करती है।

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साथ ही कुकर बम, पेन बम को भी डिफ्यूज करने की जिम्मेदारी इस शाखा के सैनिकों पर होती है। सेना में उनका चयन 2008 में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ। पहली पोस्टिंग लद्दाख के कुमाथांग में मिली थी। प्रमोशन के बाद वह मेजर बनीं। अदिति कहती हैं कि देश सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं।

वहीं दूसरी हैं किदवई नगर की रहने वाली विनीता त्रिपाठी ने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया। वह हाल ही में सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुई हैं। उनके पिता सेना में सूबेदार हैं। विनीता परिवार की पांचवीं सदस्य हैं जो सेना में गई हैं। उनके पिता विपिन त्रिपाठी, दो चाचा और एक चचेरा भाई सेना में है।

उनको पहली पोस्टिंग 158 बेस अस्पताल बागडोगरा में मिली है। विनीता कहती हैं कि सेना में आने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती हैं, लेकिन एक बार जब आप वर्दी पहनते है तो सब कुछ भूल केवल गर्व का अनुभव होता है। विनीता कहती हैं कि उनको देख परिवार की और बेटियां भी अब सेना में आने के लिए तैयारी कर रही हैं।

तिलक नगर की रहने वाली अनुश्री मिश्रा लेफ्टिनेंट हैं। 2018-19 में लेफ्टिनेंट बनी अनुश्री को पहली पोस्टिंग लेह में मिली थी। अब उनकी ट्रेनिंग उड़ीसा में चल रही है। अनुश्री बचपन से ही वर्दी वाली नौकरी करना चाहती थीं। उन्हें एयरफोर्स से लगाव था लेकिन किसी वजह से वह उसमें चयनित नहीं हो पाईं। उन्होंने बताया कि जब परिवार के लोग सोते थे तो वह सुबह अपने सपने को पूरा करने के लिए कसरत करती थीं। अनु परिवार की पहली लड़की है जो सेना में गई है।

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