टेक्सटाइल और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाने वाली शहर की जानी मानी कंपनी श्री लक्ष्मी कॉटसिन ने भी 16 बैंकों के 2700 करोड़ रुपये डुबो दिए हैं। हालांकि इस कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल की अलग-अलग कंपनियां करीब 5200 करोड़ रुपये की कर्जदार हैं।

दूसरा मामला हीरा कारोबारी उदय देसाई का है।

इन पर 3592 करोड़ की बकायेदारी में सीबीआई ने हाल ही में रिपोर्ट दर्ज की है। एमपी अग्रवाल के प्रकरण को सुलझाने के लिए एनसीएलटी का सहारा लिया है।

इन पर कुल 5200 करोड़ की बकायेदारी है, जिनमें से 2700 करोड़ के खाते एनपीए हो गए हैं। लक्ष्मी कॉटसिन का पंजीकृत कार्यालय कृष्णा नगर में है। कंपनी मुख्य रूप से टेक्सटाइल, गृह सज्जा और प्रतिरक्षा उत्पाद बनाती थी।

कंपनी की तमाम फैक्टरियाें में उत्पादन ठप हो चुका है।

सहयोगी कंपनियों की नीलामी हो रही है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एवं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने इनकी शेयर ट्रेडिंग को निरस्त कर दिया है।

न तो कोई व्यक्ति इनके शेयर को बेच सकता है और न ही खरीद सकता है।  करीब एक दशक पहले अच्छा व्यवसाय करने के बावजूद बीते पांच वर्षों में कंपनी की हालत खराब होती गई।

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