वन विभाग अफसर रहे मस्त इधर दर्जन भर राष्ट्रीय पक्षियों की मौतों से हड़कंप मच गया

कानपुर देेेहात-मोर को राष्ट्रीय पक्षी के रूप में देश की धरोहर माना जाता है, जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी खासतौर पर वन विभाग को दी गयी है लेकिन हालात ये है कि इन जिम्मेदारों की आंखे मोरों की मौतों के बाद भी नहीं खुलती है।

ऐसा ही कुछ मंजर जिले के रसूलाबाद क्षेत्र में देखने को मिला, जहां सज़ावारपुर जोत गांव में एक खेतों में एक साथ 11 मोरों की मौत हो गई।

जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

हालांंकि राष्ट्रीय पक्षियों की मौतों का कारण तो अभी तक पता नही लग सका लेकिन वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही जरूर खुल कर सामने आ गयी, जो सूचना मिलने के बाद भी समय पर नहीं पहुंचे।

 

ग्रामीणों का कहना करीब एक दर्जन हुई मौतें

वहीं गांव वालों का कहना है कि 11 से 12 मोरों की मौत हुई है, जिनमें से कई मोरों के शवो को आवारा कुत्ते खींच ले गए और अपना निवाला बना लिया है।

हैरत की बात तो यह है कि वन विभाग के अधिकारी मौके पर भी नही पहुंचे औऱ सिर्फ 5 राष्ट्रीय पक्षियों की मौत होंने की बात बता रहे है।

वही गांव वालों का कहना है कि इन मौतों की सूचना पुलिस को पहले दी थी, उसके बाद पुलिस ने वन विभग के अधिकारियों को इन मोरों के मौत की जानकारी दी थी।

 

सूचना के कई घंटे बाद पहुँचे जिम्मेदार

सूचना मिलने के कई घण्टो के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने मोर के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेजा था।

वही वन विभाग के अधिकारी सुदामा ने 5 मोरो की मौत की बात कही है।

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