उन्नाव रेप केस : एक्सीडेंट-हादसा या कुछ और? साजिश की ओर इशारा करते हैं ये इत्तेफाक

संक्षेप:

  • रविवार को रायबरेली में हुए हादसे में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता की चाची व मौसी की मौत हो गई. 
  • दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता की गाड़ी की ट्रक से हुई टक्कर के बाद तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं.
  • ट्रक की नंबर प्लेट पर कालिख पुते होने और गनर के गायब रहने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

उन्नाव: रविवार को रायबरेली में हुए हादसे में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता की चाची व मौसी की मौत हो गई, जबकि उनके वकील महेंद्र सिंह चौहान की हालत नाजुक बनी हुई है. पीड़िता को लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है. एडीजी राजीव कृष्ण का कहना है कि डॉक्टरों के मुताबिक पीड़िता और उनका वकील लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं. वहीं भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता की गाड़ी की ट्रक से हुई टक्कर के बाद तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं.

ट्रक की नंबर प्लेट पर कालिख

ट्रक की नंबर प्लेट पर कालिख पुते होने और गनर के गायब रहने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. दरअसल जिस ट्रक से पीड़िता की गाड़ी की टक्कर हुई उसके नंबर प्लेट पर काला ग्रीस लगा था. माना जा रहा है कि ट्रक का नंबर छिपाने की कोशिश की गई थी. हालांकि कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि मौरंग की ओवरलोडिंग के दौरान आरटीओ से बचने के लिए कुछ ट्रक वाले अपने नंबर प्लेट पर काला रंग लगा देते हैं.

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सुरक्षा में लगे छह पुलिसकर्मी, साथ कोई नहीं गया

किशोरी और उसके परिवार की सुरक्षा में घटना के बाद से दो गनर और चार महिला कांस्टेबल सुरक्षा में तैनात हैं. इनमें एक गनर और दो महिला कांस्टेबल किशोरी के साथ और एक गनर व दो महिला कांस्टेबल घर की सुरक्षा में लगाए गए हैं. रविवार को किशोरी अपने वकील और परिवार के सदस्यों के साथ चाचा से मिलने रायबरेली जेल जा रही थी, लेकिन उनके साथ कोई सुरक्षाकर्मी नहीं गया. एसपी एमपी वर्मा ने बताया कि किशोरी के साथ सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं गए इसकी जांच कराई जा रही है. अगर लापरवाही सामने आई तो सख्त कर्रावाई की जाएगी.

ये है मामला

उन्नाव से भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी के चाचा रायबरेली जेल में बंद हैं. किशोरी के चाचा को विधायक के छोटे भाई जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह सेंगर पर जानलेवा हमले में 10 साल की सजा हुई है. घटनाक्रम के मुताबिक वर्ष 2000 में ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान अतुल सेंगर ने किशोरी के चाचा पर जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था. मुकदमा विचारण के दौरान 4 अक्तूबर 2004 को मुकदमे का फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने न्यायालय में उपस्थित किशोरी के पिता और छोटे चाचा को दोषमुक्त कर दिया था. जबकि तीसरा आरोपी (किशोरी के बड़े चाचा) फैसला सुनाए जाने के वक्त न्यायालय में पेश नहीं हुए.

इसी मुकदमे में न्यायालय ने नवंबर 2018 को गैर जमानती वारंट जारी किया था. 20 नवंबर को माखी थाना पुलिस ने किशोरी के चाचा को उसके दिल्ली स्थित घर से गिरफ्तार किया था. पहले उन्हे उन्नाव जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया बाद में रायबरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया था. विधायक के छोटे भाई पर हुए जानलेवा हमले की मुकदमे में दो जुलाई 2019 को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश प्रहलाद टंडन ने दस साल कारावास की सजा सुनाई थी.

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