Valentine Day 2018: अखिलेश-डिंपल की लव स्टोरी है खास

संक्षेप:

  • यादव लड़का और राजपूत लड़की
  • पहली नजर में हुआ प्यार
  • दोनों ने अपने दिल की सुनी

कानपुरः 14 फरवरी को मनाया जाने वाला वेलेंटाइन डे युवाओं के लिए कुछ खास महत्व रखता है. अपने प्यार का इजहार करने के लिए प्रेमी युगल बेसब्री से इस दिन का इंतजार करते हैं. प्यार के इस महीने में अगर प्यार करने वालों की बात ना की जाए तो बात अधूरी रह जाएगी. राजनीति की दुनिया में भी कुछ ऐसे प्यार करने वाले हैं, जिन्होंने घर परिवार वालों की फिक्र किए बगैर अपने दिल की सुनी. कुछ ऐसी ही कहानी है अखिलेश और डिंपल यादव की.

यादव लड़का और राजपूत लड़की, वो भी जिसके परिवार का राजनीति से कोई लेना देना नहीं. भला यूपी के नामी गिरामी नेता मुलायम सिंह यादव कैसे इसके लिए मान जाते. राजनीति की ठसक, यूपी के सीएम का रुतबा और आर्मी बैकग्राउंड की लड़की, अखिलेश के साथ डिंपल की जोड़ी जम जाएगी, ऐसा लग तो नहीं रहा था.

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पहली नजर का प्यार!

पहली बार जब अखिलेश यादव और डिंपल की मुलाकात हुई, तब अखिलेश 21 साल के थे. डिंपल की उम्र उस वक्त सिर्फ 17 साल थी. अखिलेश को डिंपल पहली नजर में भा गईं. दोस्तों की मदद से डिंपल से उनकी मुलाकात भी हो गई लेकिन, यह खबर नहीं लगने दी कि वह मुलायम सिंह के बेटे हैं. लेकिन यह बात छिप भी नहीं सकती थी. अाखिरकार डिंपल को यह बात पता चल ही गई. मौके की नजाकत को देखते हुए दोनों ने उस वक्त अपना प्यार परिवार वालों के सामने जाहिर नहीं किया.

अखिलेश और डिंपल एक जैसे तो नहीं थे लेकिन एकसाथ रहने का फैसला जरूर कर चुके थे. अखिलेश यूपी के बड़े नेता के बेटे थे. दूसरी तरफ डिंपल के पिता रिटायर आर्मी कर्नल एससी रावत थे. एक परिवार के खून में राजनीति थी तो दूसरे परिवार का दूर-दूर तक राजनीति से कोई संबंध नहीं था. लेकिन कहते हैं ना जोड़ियां ऊपरवाला बनाता है. तो अखिलेश यादव और डिंपल की जोड़ी भी आसमान से ही बनकर आई थी.

प्यार के इकरार के बाद दोनों की जिंदगी में जुदाई के भी पल आए. अखिलेश यादव को आगे की पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना पड़ा. वहां यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से वह एनवॉयरमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर कर रहे थे. इधर डिंपल लखनऊ से ग्रेजुएशन करने लगीं. अखिलेश को फुटबॉल का शौक था जबकि, डिंपल को पेंटिंग करने और घुड़सवारी का शगल था.

प्यार बड़ा या परिवार

अखिलेश जब ऑस्ट्रेलिया से वापस लौटे तो पिता का पहला सवाल था, `शादी कब करोगे.` कहा जाता है कि मुलायम चाहते थे कि लालू प्रसाद की बेटी से उनकी शादी हो जाए लेकिन अखिलेश का दिल भला कहां मानने वाला था. अखिलेश डिंपल के बारे में खुद पिता से बात नहीं कर पा रहे थे. फिर उन्होंने अपनी दादी को पटाया. उनकी दादी उस वक्त बीमार थीं. पोते का हाल-ए-दिल जानकर दादी अखिलेश और डिंपल की शादी के लिए अड़ गईं. दोनों की शादी में सिर्फ पारिवारिक मुश्किल ही नहीं बल्कि राजनीतिक मुश्किल भी थी. एक तरफ यूपी में जात की राजनीति हो रही थी, ऐसे में अपने ही बेटे की शादी दूसरी जाति में कराना मुलायम सिंह को भारी पड़ सकता था. दूसरी तरफ उत्तराखंड राज्य की अलग मांग हो रही थी. तीसरी मुश्किल थी की लालू प्रसाद को ना कैसे कहा जाए. लेकिन हुआ वहीं जो अखिलेश चाहते थे. कहा जाता है कि अखिलेश और डिंपल की शादी के लिए मुलायम सिंह यादव को मनाने में अमर सिंह ने काफी मेहनत की थी.

24 नवंबर 1999 को अखिलेश और डिंपल की शादी हो गई. दिसंबर में क्रिसमस पर दोनों लंदन या सिडनी जाने की तैयारी कर रहे थे. उस वक्त दोनों देहरादून में थे. लेकिन मुलायम सिंह के एक फोन ने अखिलेश यादव की जिंदगी बदल दी. फोन पर कहा गया, `घर लौट आओ, कन्नौज से चुनाव लड़ना है.` आज भले ही अखिलेश राजनीति का युवा चेहरा बन गए हों लेकिन तब वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कन्नौज से चुनाव जीतकर अखिलेश सांसद तो बन गए लेकिन, कभी हनीमून पर नहीं जा पाए.

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