कमजोर छात्रों को मिलेगी एक्टिव लर्निग से संजीवनी

संक्षेप:

जागरण संवाददाता, कानपुर : कक्षा में मेधावी, औसत व औसत से नीचे इन तीन तरह के छात्रों को शिक्षक पढ़ाते हैं। कोर्स समय पर पूरा कराने के लिए आमतौर पर मेधावी और औसत छात्रों के हिसाब से पढ़ाया जाता है, जिससे औसत से नीचे यानी कमजोर छात्र पिछड़ता जाता है। बात जब इंजीनिय¨रग, गणित व विज्ञान के कोर्स की हो तो और महत्वपूर्ण हो जाती है पर अमेरिका व ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में इस्तेमाल की जा रही एक्टिव लर्निग में इसका समाधान है। ये बातें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च (एनआइटीटीटीआर) कोलकाता से आई ट्रेनर प्रो. हबीबा हुसैन ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की प्रशिक्षण कार्यशाला में कहीं।

उन्होंने कहा, एक्टिव लर्निग के अंतर्गत छात्रों को प्री इंस्ट्रक्शनल, इंस्ट्रक्शनल और पोस्ट इंस्ट्रक्शनल इन तीन तरीकों से पढ़ाया जाता है। इसमें रोल प्लान मेथड, केस स्टडी मेथड जैसे पढ़ाने के तरीके शामिल होते हैं जो कमजोर छात्रों को भी सेल्फ लर्नर बना सकते हैं। पढ़ाई डिजिटल होती जा रही है, इसलिए पढ़ाने के तरीकों में बदलाव जरूरी है। एनआइटीटीटीआर से आई दूसरी प्रशिक्षक प्रो. उर्मिला कार ने बताया कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अनुसार 20 फीसद पाठ्यक्रम ई मोड में रखा जा सकता है। इसलिए इसे पढ़ाने के तरीके भी सीखने होंगे। प्लिकर, क्लिकर व मूक्स (मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज) ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के जरिए विदेशों में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। क्लिकर एक गुरु की तरह छात्रों के प्रश्नों का जवाब देता है। भारत में भी दस से 15 फीसद शिक्षक पढ़ाने के इन तरीकों से रूबरू हो चुके हैं। प्रो. समीरन मंडल ने बताया कि देश में 25 हजार इंजीनिय¨रग व बेसिक साइंस के शिक्षकों को सालभर में एनआइटीटीटीआर के विशेषज्ञ प्रशिक्षण दे चुके हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम समन्वयक डा. संदेश गुप्ता, डा. सिधांशु पांडिया, डा. अंशु यादव मौजूद रहे।

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