पिछली सरकारों की फितरत ही दंगा थी : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 17 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रविवार को पूर्ववर्ती गैर भाजपा सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकारों की फितरत ही दंगा थी और वे दंगाइयों को प्रश्रय देकर आगे बढ़ाते थे।मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रविवार को यहां पंचायत भवन में भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा मोर्चा द्वारा आयोजित ""सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन"" के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ""भाजपा राष्ट्रवादी विचारधारा में विश्वास करती है और इसका मूल मंत्र सबके सुख की कामना, सबके आरोग्य की कामना है और इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ-सबका विकास का मंत्र दिया।

2014 से पहले प्रदेश में शासन करने वालों का नारा था-सबका साथ लेकिन परिवार का विकास।"" योगी ने कहा कि उन्‍हें (विपक्ष को) स्वयं और स्वयं के परिवार के अलावा समाज और राष्ट्र के बारे में कोई चिंता थी ही नहीं, यही कारण रहा कि प्रदेश पिछड़ता गया, बदहाली होती गई और दंगों की आग में प्रदेश झोंक दिया गया।सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में प्रदेश भर से आए प्रजापति (कुम्हार) समाज के लोगों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ""जब पर्व-त्यौहार आते थे, जब आस्था का सम्मान करना होता था, व्यापार का समय होता था, तब प्रदेश में कर्फ्यू लग जाता था, दंगे होते थे क्योंकि पिछली सरकारों की फितरत ही दंगा थी।

वे दंगाइयों को प्रश्रय देकर आगे बढ़ाते थे और दंगों से प्रदेश की जनता प्रताड़ित थी।""प्रजापति समाज के लिए भाजपा सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं की चर्चा करते हुए योगी ने कहा, ""दीपोत्सव का कार्यक्रम अयोध्या में होगा तो नौ लाख दीपक अयोध्या में जलाएंगे और हमने तय कर दिया है कि मिट्टी के ही दीपक जलाएंगे।

दीपावली के पर्व पर लक्ष्मी गणेश की मूर्ति विदेश से नहीं आनी चाहिए बल्कि वह प्रजापति समाज और माटी कला बोर्ड के माध्‍यम से बननी चाहिए।"" प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया "" जो मूर्ति बनाता था, उसकी मूर्ति बिकती नहीं थी, जो दिया बनाता था उसके दिये तोड़ दिए जाते थे और उसके बाद पर्व त्यौहार को अंधेरे में धकेल दिया जाता था, लेकिन आप लोगों ने देखा होगा कि उत्तर प्रदेश में पिछले साढ़े चार वर्ष में एक भी दंगा नहीं हुआ।"’सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की ही सोच थी कि पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को भी मान मिले, सम्मान मिले, भरपेट भोजन मिले और रहने को घर मिले और समाज में उसको प्रतिष्ठा मिले।

भाषा आनन्द प्रशांत मानसीमानसी।

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