विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा को वॉक ओवर देने के मूड में नहीं सपा, पिछड़ा वर्ग का उम्मीदवार उतारने की तैयारी

संक्षेप:

  • 16 अक्तूबर को अंतिम फैसला लेंगे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव।
  • विधानसभा उपाध्यक्ष विपक्ष का होगा।
  • साढ़े चार साल तक उपाध्यक्ष पद रहा खाली।

लखनऊ- विधानसभा उपाध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी दो-दो हाथ करने के मूड में है। वह भाजपा को किसी भी कीमत पर वॉक ओवर नहीं देना चाहती है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग का उम्मीदवार उतारने की तैयारी है। फिलहाल अंतिम फैसला 16 अक्तूबर को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में होने वाली बैठक में लिया जाएगा।

अभी तक की परिपाटी रही है कि विधानसभा उपाध्यक्ष विपक्ष का होगा। साढ़े चार साल तक उपाध्यक्ष पद खाली रहा। अब सदन का कार्यकाल खत्म होने से पहले उपाध्यक्ष चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। भाजपा ने सियासी चाल चलते हुए सपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर सदन पहुंचे हरदोई विधायक नितिन अग्रवाल पर दांव लगाया है। विधायक नितिन अग्रवाल केपिता नरेश अग्रवाल भाजपा में जा चुके हैं। सपा ने विधायक नितिन अग्रवाल को अयोग्य ठहराने के लिए याचिका दायर की थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष खारिज कर चुके हैं।

ऐसे में समाजवादी पार्टी विधानसभा उपाध्यक्ष के चुनाव में भाजपा का विरोध करने की तैयारी में है। पार्टी वैश्य के सामने पिछड़े वर्ग का उम्मीदवार उतार कर सियासी संदेश देने की तैयारी में है। इसके लिए सीतापुर के विधायक नरेंद्र वर्मा सहित कई नाम पर विचार चल रहा है। नरेंद्र वर्मा कुर्मी बिरादरी के हैं। सपा इस वोटबैंक को अपने खेमे में करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पार्टी के 49 विधायक हैं।

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रणनीतिकारों का मानना है कि सदन कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले उपाध्यक्ष का चुनाव कराकर भाजपा वैश्य मतों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। ऐसे में भाजपा का विरोध जरूरी है। दूसरी अहम बात यह है कि भाजपा नितिन अग्रवाल को सपा का बताकर मैदान में उतार रही है। जबकि वे सपा के बागी हैं। इस वजह से भी सपा वॉक ओवर देने के मूड में नहीं है। फिलहाल अभी इस मुद्दे पर खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है। 

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