अखिलेश और मायावती का हुआ गठबंधन, 38-38 सीटों पर लड़ेंगी दोनों पार्टियां

संक्षेप:

  • आज वह हुआ जिसकी यूपी राजनीति में कभी कल्पना नहीं की
  • बसपा सपा का गठबंधन बीजेपी को कामयाब नहीं होने देगा
  • रायबरेली और अमेठी से उनका गठबंधन प्रत्याशी नहीं उतारेगा

प्रदेश की राजनीति में आज वह हुआ जिसकी शायद यूपी की राजनीति में किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। 23 साल से एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे सपा और बसपा एक मंच पर खड़े हुए थे। वहीं कांग्रेस से गठबंधन को लेकर मायावती का कहना था कि हम कांग्रेस के साथ नहीं खड़े हैं। लेकिन लोकसभा की 2 सीटें अमेठी और रायबरेली हमने कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ दी है।

आपको बता दें प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा कि यह पीएम मोदी और अमित शाह की नींद उड़ाने वाली सपा-बसपा की प्रेस कांफ्रेंस हैं। मायावती ने सपा-बसपा गठबंधन को लेकर कहा कि 1993 में भी विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ था लेकिन किन्ही गंभीर कारणों से यह गठबंधन नहीं चल पाया था। प्रेस कांफ्रेंस की शुरूआत में ही मायावती ने बीजेपी पर हमला बोला।

मायावती ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी ने बीजेपी की कमर तोड़ दी है। इस बार बीजेपी एंड कंपनी के लोगों को किसी तरह रोकना है। बसपा सपा का गठबंधन किसी तरह बीजेपी को कामयाब नहीं होने देगा। मायावती ने कहा कि कांग्रेस को क्यों शामिल नहीं किया है ये सवाल आप करे उससे पहले वह बता दे रही हैं कि आजादी के बाद लंबे समय तक यूपी और देश में कांग्रेस ने राज किया पर इस काल में गरीब पिछड़े दलित परेशान ही रहे। इसलिए उनके साथ गठबंधन नहीं किया। वहीं उन्होंने कहा कि रायबरेली और अमेठी से उनका गठबंधन प्रत्याशी नहीं उतारेगा।

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