मिशन 70 प्लस: यूपी फतह के लिए PM मोदी ने की 29 तो CM योगी ने की 137 चुनावी सभा

संक्षेप:

  • मिशन 2019 को फतह करने के लिए बीजेपी नेताओं ने उत्तर प्रदेश में चार सौ से ज्यादा सभाएं कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया.
  • मोदी ने 29 सभाएं और एक रोड शो किया.
  • शाह ने 28 सभाओं और दो रोड शो से भाजपा के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश की.

लखनऊ: मिशन 2019 को फतह करने के लिए बीजेपी नेताओं ने उत्तर प्रदेश में चार सौ से ज्यादा सभाएं कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया. अंतिम चरण के आखिरी पांच दिनों में पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक दिन छोड़कर करीब सभी दिन यूपी में ही रहे और बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांगे. मोदी ने 29 सभाएं और एक रोड शो किया. शाह ने 28 सभाओं और दो रोड शो से भाजपा के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश की.  सीएम योगी आदित्यनाथ भी बड़े स्टार प्रचारक बनकर उभरे. उन्होंने न सिर्फ यूपी में सभाओं का शतक पूरा करते हुए 137 सभाएं की, बल्कि प्रदेश के बाहर भी 26 सभाएं कीं. उन्होंने कुल 163 सभाएं व कई रोड शो भी किए. गृहमंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा ने भी कई सभाएं कीं.

उद्घाटन व शिलान्यास के बहाने पीएम मोदी ने बीजेपी की चुनावी जमीन सजानी तो दिसंबर 2018 से ही शुरू कर दी थी. चुनाव की अधिकृत घोषणा होने से पहले ही उन्होंने बुंदेलखंड में डिफेंस कॉरिडोर का शिलान्यास और गोरखपुर में भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन करके चुनावी अभियान शुरू कर दिया था. जिसे उन्होंने काशी में प्रवासी भारतीय सम्मेलन, कुंभ स्नान और इससे पहले कुंभ के कामों की व्यवस्था के निरीक्षण के बहाने भी परवान चढ़ाया.

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इसमें हाथ बंटाया योगी, राजनाथ व नितिन गडकरी के अलावा दोनों उप मुख्यमंत्री समेत कई केंद्रीय व प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने. शाह ने बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क और अन्य संगठनात्मक गतिविधियों से चुनावी अभियान पहले ही शुरू कर दिया था. प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने कुल 477 सभाएं कीं.

पश्चिम से शुरुआत, योगी की बढ़ी मांग

प्रधानमंत्री ने 28 मार्च को मेरठ में सभा करके प्रचार अभियान शुरू किया. बीजेपी ने मोदी की प्रदेश में 50 सभाएं मांगी थी. लेकिन 27 सभाओं को ही मंजूरी मिली. बाद में इसमें दो सभाएं और जुड़ी. हालांकि चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत सीएम योगी ने सहारनपुर में मां शाकुंभरी देवी मंदिर के दर्शन और सभा के साथ पहले ही कर दी थी. योगी ने लोकसभा के सभी क्षेत्रों में एक-एक सभा की. पर जब कहीं से उनकी अन्य सभाओं की मांग हुई तो यह संख्या बढ़कर 137 हो गई. योगी की मांग सिर्फ यूपी में ही नहीं रही, बल्कि मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित देश के अन्य कई प्रदेशों और खासतौर से पश्चिम बंगाल में भी रही. वहां भी उनकी कई सभाएं हुईं.

बीजेपी प्रचारकों ने आरोप-प्रत्यारोप के बीच सेट किया राष्ट्रवाद व विकास का मुद्दा

वैसे तो सभी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर रहा, पर बीजेपी के स्टार प्रचारकों ने पूरा चुनाव राष्ट्रवाद, विकास और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर फोकस कर लड़ा. मुद्दे सेट करने पर भी ध्यान दिया. पश्चिम में हिंदुत्व के एजेंडे को धार दी तो पूरब में चुनाव को पिछड़ी जातियों की लामबंदी पर केंद्रित रखा. चुनाव आयोग ने जब योगी की सभाओं पर 72 घंटे की रोक लगाई तो वे हनुमान मंदिरों के दर्शन के सहारे चुनावी सरोकार पूरे करते दिखे.
पीएम मोदी ने जहां अपनी सभाओं से कांग्रेस के 55 साल बनाम अपने पांच वर्ष के कार्यकाल को मुद्दा बनाया तो सीएम योगी ने भी अपने दो वर्षों का रिपोर्ट कार्ड देकर कांग्रेस और अन्य विपक्ष को अपने काम न बताने को लेकर घेरा.

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