मैंगो फेस्टिवल- 2018: जब सीएम योगी आदित्यनाथ मिले `योगी आम`

संक्षेप:

  • आम महोत्सव-2018 का आयोजन
  • 23 से 24 जून तक चलेगा ये महोत्सव
  • 725 किस्म के आमों को प्रदर्शित किया जाएगा

लखनऊ: अगर आप भी हैं फलों के राजा आम के शौकीन तो आम की सात सौ प्रजातियों का एक साथ लुत्फ़ लेने के लिए 23-24 जून को आपका नवाबों की नगरी लखनऊ में स्वागत है। आम महोत्सव का शुभांरभ शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सीएम योगी ने किया। इस दौरान सीएम ने कहा कि प्रदेश के अंदर मंडियों को सुधारने का भी कार्य किया जा रहा है। साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखते हुए मंडियों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

आम महोत्सव में 725 किस्म के आमों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें से अधिकांश का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। आम से बनने वाले उत्पादों को भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। किसानों को परंपरागत खेती के अलावा हार्टी कल्चर, पशुपालन की ओर भी जाना होगा। जिन किसानों ने इस क्षेत्र में कार्य किया वो आज प्रेरणास्रोत के रूप में हमारे सामने हैं। मार्केटिंग के अभाव में हम चीजों की ब्रांडिंग नहीं कर पाते हैं।

ये भी पढ़े : संभल में बोलेरो की केंटर से भीषण टक्कर, 8 लोगों की मौत, 9 की हालत गंभीर


उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाली आम की सर्वाधिक प्रजातियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। आम उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय को दोगुना करने, उनके चेहरे पर खुशहाली लाने का जो प्रयास आम महोत्सव के माध्यम से किया जा रहा है, वह सराहनीय है। दुनिया में आम की जिस प्रजाति की मांग ज्यादा होती है, उसको विकसित करने की दिशा में उद्यान विभाग और मंडी परिषद को कार्य करने की जरूरत है। प्रदेश आम उत्पादन में भी नंबर वन बने, इसके लिए प्रयास किए जाने की आवश्कता है।

महोत्सव में आम की करीब 700 प्रजातियों का प्रदर्शन के लिये रखा गया। महोत्सव के नोडल अधिकारी एसवी शर्मा ने बताया कि महोत्सव का मकसद प्रदेश में आम की विविध प्रजातियों से लोगों को परिचित कराना है। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से आयोजित उक्त महोत्सव में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गुजरात के आम उत्पादक एवं सरकारी संस्थाएं भी भाग ले रही हैं। इसका समापन राज्यपाल राम नाईक रविवार को करेंगे।

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Lucknow Hindi News here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें |

Related Articles